एयर इंडिया को कर्ज़ से उबारने की कोशिश

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कर्ज़ और घाटे की मार झेल रही सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को दुविधा से निकालने के लिए दिल्ली में एक मंत्री-समूह की बैठक हो रही है.

एक अनुमान के मुताबिक इस वक़्त एयर इंडिया का कुल घाटा 16,000 करोड़ रुपए हैं और 42,000 करोड़ रुपए का कर्ज़ चढ़ा हुआ है.

इस बैठक से एयर इंडिया को उम्मीद है कि सरकार कंपनी के घाटे और कर्ज़ को उतारने के लिए उसे पैसा मुहैया करेगी.

इस बैठक में तय किया जाएगा कि एयर इंडिया को 1,200 करोड़ रुपए के शेयर प्रदान करने के लिए वित्तीय मामलों पर बनी कैबिनेट समिति का दरवाज़ा खटखटाया जाए या नहीं.

साथ ही इस बैठक में ड्रीमलाइनर के इस्तेमाल और एयर इंडिया की आगे की रणनीति के बारे में भी चर्चा होगी और कंपनी की वित्तीय हालत सुधारने के लिए उपायों पर चर्चा की जाएगी.

कर्ज़ और घाटे से उबरने के लिए एयर इंडिया ने सरकार से कम से कम 6,000 करोड़ रुपए के अग्रिम शेयर की मांग की है. इसके अलावा अगले दस सालों में करीब 6,000 करोड़ रुपए की मांग भी सरकार से की गई है.

रोज़ी रोटी

कंपनी ने सरकार से ये भी मांग की थी कि पिछले पांच सालों में वीआईपी हस्तियों के लिए ख़ास उड़ानों के लिए बकाया राशि भी उसे दी जाए.

एयर इंडिया प्रबंधन ख़ुद प्रधानमंत्री कार्यालय को बता चुका है कि उसे अपने कर्ज़ो पर ब्याज़ चुकाने में दिक्कत आ रही है.अब तेल कंपनियों को ईंधन के लिए भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है.

ग़ौरतलब है कि एयर इंडिया ने तीन साल पहले बोइंग के 27 आधुनिक विमान – बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ऑर्डर किए थे, जिनकी क़ीमत लगभग 9.8 करोड़ डॉलर थी.

भारत को अक्तूबर तक पहला और साल के अंत तक चार ड्रीमलाइनर विमान मिलने की उम्मीद है.

बोइंग का ड्रीमलाइनर विमान एक हल्का और कम ईंधन ख़पत करने वाला विमान बताया जाता है. इस विमान को मध्यम दूरी के रास्तों के लिए बेहतर माना जा रहा है.

एयर इंडिया के प्रवक्ता कमलजीत रत्तन का कहना है कि ड्रीमलाइनर एयर इंडिया के लिए एक बहुत अहम निवेश है और इसे कंपनी की रोज़ी-रोटी माना जा रहा है.

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