तेल निर्यात पर भारत को ईरान की चेतावनी

ईरान
Image caption भारत के कुल आयात का 13 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आता है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रमीन मेहमनपरस्त ने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि उसके निर्यात किए गए तेल का भुगतान ठीक समय पर और उचित शर्तों के अनुरूप नहीं हो सकेगा, तो वो भारत को होने वाले कच्चे तेल के निर्यात पर पुनर्विचार करेगा.

पिछले दो दिनों में ईरान ने दो बार ऐसी चेतावनी जारी की है. सोमवार को ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से कहा था कि अगर भुगतान से संबंधित विवाद नहीं सुलझता है तो ईरान पहली अगस्त से भारत को तेल निर्यात करने की इजाज़त नहीं देगा.

समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि ईरान सेंट्रल बैंक के गवर्नर मोहम्मद बहमनी ने कहा है कि भारत को ईरान के पांच अरब डॉलर अदा करने हैं.

सउदी अरब के बाद कच्चे तेल के लिए ईरान भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है और भारतीय कंपनियां वहां से प्रतिदिन चार लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करती हैं.

लेकिन पिछले कुछ दिनों से ईरान के ख़िलाफ़ लगे आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से उसे इस माल के लिए भुगतान करने में दिक़्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत ने इस मामले को फ़रवरी के आसपास सुलझाने की कोशिश भी की थी जब दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच भुगतान के लिए यूरो मुद्रा के इस्तेमाल के लिए समझौता हो गया था जिसे जर्मनी के एक बैंक के माध्यम से करवाया जाना था. लेकिन किसी कारण से वो व्यवस्था कारगर नहीं हो पाई.

भारत का केंद्रीय बैंक, वित्त और तेल मंत्रालय अब भी इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं हालांकि अधिकारीगण इसकी तफ़सील बताने से इंकार कर रहे हैं.

लेकिन इन सबके बीच ईरान की चेतावनी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं.

तेल क्षेत्र की विशेषज्ञ और हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की वरिष्ठ पत्रकार अनुपमा एयरी कहती हैं, जबकि भुगतान के मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, दुबारा इस मुद्दे को उठाने को अमरीकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन की भारत यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है. ताकि भारत इस मामले को अमरीका के सामने उठाए और कोई रास्ता निकल सके."

ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध इस नाम पर लगाए गए हैं कि वो परमाणु हथियार कार्यक्रम चला रहा है.

हालांकि अनुपमा एयरी मानती हैं कि ईरान के निर्यात रोकने का भारतीय तेल बाज़ार पर कोई बड़ा असर नहीं पडे़गा क्योंकि पिछले लगभग छह महीने से जारी इस विवाद के मद्देनज़र भारतीय कंपनियां सउदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बात कर रही हैं.

भारत से मुख्यत: इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन और प्राईवेट कपंनी एस्सार ऑयल निर्यात करती हैं.

इसी बीच ख़बर है कि इंडियन ऑयल की सहायक मैंगलोर रिफाइनरी तेल निर्यात के लिए सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के देशों से बातचीत कर रही है.

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