वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़त

Image caption यूरोप में प्रत्यक्ष विदेश निवेश में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई है.

वैश्विक निवेश पर संयुक्त राष्ट्र की सालाना रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 में वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में पांच प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली और कुल मिलाकर 12.4 खरब डॉलर का वैश्विक निवेश हुआ है.

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 के अंत में अपेक्षा से 15 प्रतिशत कम निवेश देखने को मिला.

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास कांफ़्रेंस ने उम्मीद जताई है कि 2011 में वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़त देखने को मिलेगी.

रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार साल 2012 में 17 खरब डॉलर का विदेशी निवेश होने की संभावना होगी और 2013 में ये आंकड़ा 19 खरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, बढ़ती महंगाई और ऋण संकट का बुरा असर वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर पड़ सकता है.

आर्थिक संकट से जूझते यूरोप में सबसे ज़्यादा गिरावट देखने को मिली है, जिसके लिए सरकार की असफल होती आर्थिक कदम और ऋण संकट को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वैश्विक सूची में अमरीका सबसे ऊपर है, यानि साल 2010 में अमरीका में सबसे ज़्यादा विदेशी निवेश हुआ.

एशिया की मज़बूती

इस सूची में चीन दूसरे स्थान पर है. साल 2007 में जहां इस सूची में भारत आंठवें नंबर पर था वहीं 2010 में उसका स्थान गिर कर 14वां हो गया है.

रिपोर्ट में सामने आया है कि दक्षिणी एशिया, पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया में साल 2010 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 24 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जो कि वैश्विक उद्योग का एक-चौथाई हिस्सा है.

लेकिन केवल दक्षिणी एशिया की बात की जाए, तो वहां के देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में कमी आई है.

भारत में जहां 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, तो पाकिस्तान में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है. हालांकि बांग्लादेश में 30 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में उभरती और परिवर्तित होती अर्थव्यवस्थाओं की 50 प्रतिशत की भागीदारी है और ऐसी अर्थव्यस्थाओं में आपसी निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है.

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