महंगाई ग़ायब नहीं होगी: प्रणब

प्रणब मुख़र्जी इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption मुखर्जी के अनुसार बजे दरों में सख्ती के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छा बढ़ेगी

भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि ब्याज़ की दरें लगातार बढ़ाने और और अन्य प्रयासों बावजूद साल के अंत तक महंगाई की दर छह से सात फ़ीसदी रहने की उम्मीद है.

बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीच में वित्त मंत्री ने कहा, "हम मुद्रास्फ़ीति से लड़ रहे हैं और रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट बढ़ा कर एक कड़ा संकेत भी दिया है. लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बावजूद इसके साल के अंत तक महंगाई की दर छह से सात फ़ीसदी रह सकती है."

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार को मुख्य ब्याज़ दरों में 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ा कर उद्योगों, बाज़ारों और बैंकों से क़र्ज़ लेने वालों को हिला दिया था.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि फ़रवरी 2010 में खाद्य वस्तुओं में महंगाई की दर 22 प्रतिशत थी. वित्त मंत्री कहा, "हालाँकि अपने उच्चतम स्तर से खाने-पीने की चीज़ों में महंगाई की दर कम हुई है लेकिन आठ फ़ीसदी की दर बर्दाश्त से बाहर है."

मुखर्जी ने यह तो माना कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियाँ हैं, लेकिन उनके अनुसार निराशा का कोई कारण नहीं है.

'सकारात्मक संकेत'

वित्त मंत्री ने कहा कि नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, "वित्तीय वर्ष 2009-2010 में ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं की ओर से किया जाने वाला ख़र्च बढ़ा है. इससे साबित होता है कि समृद्धि और आर्थिक विकास का फ़ायदा आम आदमी तक पहुँच रहा है."

मुख़र्जी ने एक दूसरे सकारत्मक संकेत की बात करते हुए कहा, "इस बात के संकेत हैं कि 30 जून को ख़त्म होने वाली तिमाही में कॉर्पोरेट जगत में नौकरियां बढ़ रहीं हैं. सूचना प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता उत्पाद की चीज़ें और स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्र सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं."

वित्त मंत्री ने आशा जताई की जल्द ही भारतीय अर्थव्यवस्था दो साल पहले आई वैश्विक आर्थिक मंदी के पहले सी विकास की दर को पा लेगी.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2008-09 में विकास दर 6 .6 प्रतिशत की दर रही. साल 2009-10 में यह आठ फ़ीसदी सालाना रही. पिछले साल 2010 -11 में यह 8.5 प्रतिशत रही. उम्मीद है कि इस साल विकास के उस दर को छू लेंगे जो वैश्विक मंदी के पहले थी.

संबंधित समाचार