एशियाई शेयर बाज़ार भी लुढ़के

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वॉल स्ट्रीट में पिछले दो साल के सबसे ख़राब दिन और वैश्विक शेयरों की भारी बिकवाली के बाद शुक्रवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दिख रही है.

जापान के निक्केई में सूचकांक 225 अंक गिर गया है जो 3.4 प्रतिशत की गिरावट है, जबकि दक्षिण कोरिया में शेयर बाज़ार में 4.2 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

भारत में भी शेयर बाज़ार में शुरुआती कारोबार में सूचकांक 483 अंकों की गिरावट के साथ खुला है और सूचकांक 13 महीनों के न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा है.

भारतीय शेयर बाज़ार धराशाई

इससे पहले गुरुवार को अमरीका और यूरोप के शेयर बाज़ारों धराशाई हो गए थे.

विश्लेषक बता रहे हैं कि अमरीका में आर्थिक स्थिति में सुधार को लेकर पैदा हुई आशंका और यूरोज़ोन में कर्ज़ के संकट की वजह से वहाँ के बाज़ार में निराशा की स्थिति पैदा हुई है.

उनका कहना है कि अगले कुछ हफ़्तों तक वैश्विक बाज़ार की हालत इसी तरह से डावाँडोल रहेगी.

निराशा का माहौल

एक्शन इकॉनॉमिक्स फ़ोरकास्टिंग के डेविड कोहेन का कहना है, "वैश्विक अर्थव्यवस्था की आ रही सुस्ती को देखते हुए निवेशकों ने साँस रोक रखी है."

"लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एक बार यूरोज़ोन की सारी राजनीतिक आशंकाएँ ख़त्म हो जाएँ और अमरीका के वित्तीय मुद्दे हल हो जाएँ तो बाज़ार को वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास का सहारा मिलेगा."

उनका कहना है, "लेकिन अमरीका के बाहर के पिछले दो हफ़्तों के आंकड़े निराशा पैदा करने वाले रहे हैं और इसने चिंता जगाई है कि अमरीका में मंदी से उबरने की गति उससे कहीं अधिक धीमी होगी जितना लोग अनुमान लगा रहे थे."

अमरीका और यूरोप

गुरुवार को अमरीका के डाउ जोन्स के सूचकांक में वर्ष 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

वहाँ 4.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद सूचकांक में 512.76 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

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Image caption एशियाई बाज़ारों पर यूरोप और अमरीका के बाज़ारों का असर दिख रहा है

वॉल स्ट्रीट के दूसरे सूचकांकों में भी भारी गिरावट देखने में आई.

दूसरी ओर यूरोप में बिकवाली का भारी दबाव रहा और प्रमुख सूचकांकों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

लंदन और फ़्रैंकफ़र्ट के शेयर बाज़ारों के लिए गुरुवार का दिन इस साल का सबसे ख़राब दिन रहा और दोनों ही स्थानों पर शेयर बाज़ार 3.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.

ऐसा यूरोज़ोन संबंधी कर्ज़ संकट के बढ़ने और इसका असर इटली-स्पेन तक पहुंचने की आशंकाओं की वजह से हुआ है.

यूरोपीय संघ की ओर से बाज़ारों को स्थिर रखने की तमाम कोशिशें नाकाम होती नज़र आ रही हैं.

बाज़ारों में ये गिरावट यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुएल की उस चेतावनी के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा था कि यूरोपीय देशों में कर्ज़ का ये संकट तेज़ी से फैल रहा है.

मैनुएल ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखकर कहा था कि बाज़ार में इस बात का विश्वास ज़रूरी है कि इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

चेतावनी

Image caption यूरोपीय बाज़ार में गिरावट इस साल की सबसे बड़ी गिरावट है

पिछले कुछ समय से कई यूरोपीय देश कर्ज़ चुकाने के संकट से जूझ रहे हैं और चिंता जताई जा रही है कि स्पेन और इटली भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. इटली यूरोज़ोन की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है.

हालांकि बीते सोमवार अमरीका में क़र्ज़ लेने की सीमा को बढ़ाने को लेकर हुए समझौते का विश्व अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ारों पर सकारात्मक असर देखने को मिला था.

अमरीका के ऋण संकट को लेकर समझौते ने पूरी दुनिया के बाज़ार को राहत दी थी.

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर के अनुसार यूरोप में सरकारों की ऋण संबंधी समस्याओं, बैंकों पर दबाव और विकास दर कमज़ोर होने की संभावनाओं की वजह से यूरोप शेयर बाज़ार के व्यापारियों की चिंता का केंद्र बन गया है.

इसी कारण यूरोपीय शेयर बाज़ारों में बैंकों के शेयरों में ख़ास गिरावट देखने को मिली है. और यही हाल रहा तो आने वाले समय में यूरोप में आयात की मांग घटेगी.

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