दुनिया भर में बाज़ार धराशाई

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Image caption दुनिया भर में शेयर बाज़ारों में काफ़ी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है

अमरीकी और यूरोपीय बाज़ारों में आई गिरावट के बाद धड़ाम से गिरा भारतीय बाज़ार शाम होते-होते कुछ सँभला और 17 हज़ार से ऊपर बंद हुआ.

बंबई शेयर बाज़ार शुक्रवार को 483 अंकों की गिरावट के साथ ही खुला था और एक समय तो ये 16990 तक जा पहुँचा जो कि एक साल का सबसे नीचा स्तर था.

मगर शाम होते-होते सेंसेक्स 387 अंकों की गिरावट के साथ 17305 पर बंद हुआ. उधर निफ़्टी में सूचकांक 120 अंकों की गिरावट के साथ 5200 से ऊपर बंद हुआ.

वैसे निफ़्टी भी एक समय 5116 पर पहुँच गया था जो कि एक साल से अधिक समय में सबसे नीचे था.

यूरोप में गिरावट

यूरोप में अधिकतर बाज़ार शुरुआती कुछ घंटों में दो से तीन प्रतिशत तक गिर गए.

ब्रिटेन में बैंकों के शेयरों में काफ़ी बड़ी गिरावट दर्ज हुई जहाँ रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड के शेयर आठ प्रतिशत और लॉयड्स बैंकिग समूह के शेयर तीन प्रतिशत तक गिर गए.

Image caption भारतीय शेयर बाज़ार एक साल के सबसे निचले स्तर तक जा पहुँचे

इससे पहले जापान का शेयर बाज़ार 3.7 प्रतिशत और हॉन्गकॉन्ग 4.6 प्रतिशत गिरा.

दरअसल अधिकतर निवेशकों को डर है कि दुनिया में अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिशों का दम निकल रहा है. यूरोप में ऋण संकट गहराता जा रहा है जहाँ स्पेन या इटली के ऋण से निबट नहीं पाने का डर और ज़्यादा हो गया है.

इन दोनों ही देशों में बैंक पैसा जुटाने में विफल हो रहे हैं और अब ये चिंता हो गई है कि इससे पूरे यूरोप में ऋण के लिए धन मिलना मुश्किल हो जाएगा और इसका असर देशों के विकास पर पड़ सकता है.

निवेशकों का डर

दूसरी बड़ी चिंता अमरीकी अर्थव्यवस्था की सेहत की है. पिछले कुछ महीनों में इस अर्थव्यवस्था में एक ठहराव सा आ गया है जबकि आर्थिक प्रगति रुक गई है और बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है.

यूरोप को लेकर एक ये छवि बन रही है कि यूरोपीय नेता एकजुट होकर इस क्षेत्र के संकट से निबटने में विफल हो रहे हैं और इस क्षेत्र में एक स्पष्ट नेतृत्त्व नहीं है.

अमरीका में भी ऋण की सीमा बढ़ाने को लेकर जितनी खींचतान हुई उसके बाद अमरीकी नेताओं की कड़ी आलोचना हुई है.

इन सबका नतीजा ये हो रहा है कि अनिश्चितता की स्थिति बढ़ती जा रही है जहाँ अब तक सुरक्षित लगने वाले निवेश भी ख़तरे से भरे दिख रहे हैं और निवेशक इससे बचने की राह तलाशने में लग गए हैं.

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