ओबामा ने दिलाया भरोसा, बाज़ार फिर भी पस्त

  • 6 अगस्त 2011
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Image caption दुनिया भर में शेयर बाज़ारों में काफ़ी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है

अमरीका में शुक्रवार को जारी हुए रोज़गार और नौकरियों के अवसर संबंधी आंकड़ें बेहतर तस्वीर दिखाते हैं लेकिन शेयर बाज़ारों में आई गिरावट इससे थमती नज़र नहीं आती.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इन आंकड़ों को सकारात्मक मानते हुए बाज़ारों के हालात सुधरने की उम्मीद जताई है. अपने बयान में उन्होंने कहा कि अमरीका इस मुश्किल स्थिति से बाहर ज़रूर निकलेगा.

ओबामा ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि अमरीकी नागरिक और दुनियाभर में हमारे सहयोगी देश इस बात को समझें कि अमरीका इस मुश्किल दौर से बाहर आएगा. चीज़ें बेहतर होंगी और हम मिलकर इसके सामना कर पाएंगे.''

हालांकि जानकारों का मानना है कि कर्ज़ संकट से जुड़े समझौते पर विपक्षी दल के साथ हुई खींचतान के बाद राष्ट्रपति ओबामा के पास अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अधिक राजनीतिक विकल्प नहीं है.

इस बीच अमरीकी समाचार चैनल एबीसी के मुताबिक क्रेडिट रेटिंग संस्था 'स्टैंडर्ड एंड पूयर्स' अमरीकी सरकार की कर्ज़ क्षमता की रेटिंग गिरा सकती है.

रेटिंग के कम किए जाने पर निवेशकों के भरोसे और धक्का लगेगा जिससे बाज़ार प्रभावित होंगे.

आर्थिक अस्थिरता का संकट

इस बीच यूरोज़ोन में आर्थिक अस्थिरता के संकट का केंद्र बन चुके इटली, के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कहा है कि वो जल्द से जल्द खर्च में कटौती संबंधी घोषणाएं करने की कोशिश में जुटे हैं.

इस मसले पर विचार के लिए अगले कुछ दिनों में जी-7 देशों की एक बैठक बुलाए जाने की बात भी कही गई है.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अस्थिरता के चलते शुक्रवार को यूरोप में अधिकतर बाज़ार शुरुआती कुछ घंटों में दो से तीन प्रतिशत तक गिर गए.

ब्रिटेन में भी बैंकों के शेयरों में काफ़ी बड़ी गिरावट दर्ज हुई जहाँ रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड के शेयर आठ प्रतिशत और लॉयड्स बैंकिग समूह के शेयर तीन प्रतिशत तक गिर गए.

इससे पहले जापान का शेयर बाज़ार 3.7 प्रतिशत और हॉन्गकॉन्ग 4.6 प्रतिशत गिरा.

Image caption ओबामा ने अपने बयान में कहा है कि अमरीका इस मुश्किल दौर से जल्द बाहर आएगा.

दरअसल अधिकतर निवेशकों को डर है कि दुनिया में अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिशों का दम निकल रहा है. यूरोप में ऋण संकट गहराता जा रहा है जहाँ स्पेन या इटली के ऋण से निबट नहीं पाने का डर और ज़्यादा हो गया है.

इन दोनों ही देशों में बैंक पैसा जुटाने में विफल हो रहे हैं और अब ये चिंता हो गई है कि इससे पूरे यूरोप में ऋण के लिए धन मिलना मुश्किल हो जाएगा और इसका असर देशों के विकास पर पड़ सकता है.

निवेशकों का डर

दूसरी बड़ी चिंता अमरीकी अर्थव्यवस्था की सेहत की है. पिछले कुछ महीनों में इस अर्थव्यवस्था में एक ठहराव सा आ गया है जबकि आर्थिक प्रगति रुक गई है और बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है.

यूरोप को लेकर एक ये छवि बन रही है कि यूरोपीय नेता एकजुट होकर इस क्षेत्र के संकट से निबटने में विफल हो रहे हैं और इस क्षेत्र में एक स्पष्ट नेतृत्त्व नहीं है.

अमरीका में भी ऋण की सीमा बढ़ाने को लेकर जितनी खींचतान हुई उसके बाद अमरीकी नेताओं की कड़ी आलोचना हुई है.

इन सबका नतीजा ये हो रहा है कि अनिश्चितता की स्थिति बढ़ती जा रही है जहाँ अब तक सुरक्षित लगने वाले निवेश भी ख़तरे से भरे दिख रहे हैं और निवेशक इससे बचने की राह तलाशने में लग गए हैं.

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