दुनियाभर के बाज़ार में घबराहट

  • 8 अगस्त 2011
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Image caption यूरोपीय बाज़ारों में नकारात्मक रुख़ देखने को मिला

अमरीका की क्रेडिट रेटिंग और यूरोपीय देशों में कर्ज़ संकट की आशंका से अंतरराष्ट्रीय शेयर बाज़ारों में भूचाल जारी है.

अमरीका में शेयर बाज़ार की शुरुआत गिरकर हुई है.

लोग इस आशंका में शेयर बेच रहे हैं कि अमरीका मंदी की ओर बढ़ रहा है. यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने इटली और स्पेन में सरकारी बॉन्ड ख़रीदने में लाखों यूरो ख़र्च किए हैं.

इसका असर इटली और स्पेन में देखने को तो मिला, लेकिन बाक़ी के यूरोपीय देशों में गिरावट का दौर जारी रहा. एशियाई बैंकों का भी बुरा हाल रहा.

यूरोप का हाल

जी-7 के देशों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से मिले आश्वासन के बाद यूरोपीय बाज़ारों में शुरुआत में कुछ स्थिरता देखी गई लेकिन कुछ समय बाद फिर गिरावट आई शुरू हो गई है.

एशियाई देशों के शेयर बाज़ार में आई भारी गिरावट के बाद यूरोपीय बाज़ारों में भी इसके असर की बात की जा रही थी.

लेकिन लंदन और पेरिस में बाज़ार सकारात्मक अंदाज़ में खुले. स्पेन और इटली के बाज़ारों में भी तेज़ी देखी गई.

स्पेन और इटली के बाज़ारों में दो प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. निवेशकों ने इस ख़बर का स्वागत किया कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से दोनों देशों के सरकारी बॉन्ड ख़रीदे जा रहे हैं.

शुक्रवार को रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स की ओर से अमरीका की रेटिंग कम करने के फ़ैसले के बाद एशियाई बाज़ार सोमवार को आशंका के माहौल में खुले.

जापान और दक्षिण कोरिया में शेयर बाज़ारों में 2.2 फ़ीसदी की गिरावट आई. हांगकांग का हांगसेंग 3.8 फ़ीसदी गिर गया.

जानकारों का कहना है कि जी-7 और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के वित्तीय मदद देने के वादे के बावजूद आने वाले सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय शेयर बाज़ारों की स्थिति डवाँडोल ही रहेगी.

भारतीय शेयर बाज़ार

अमरीका के कर्ज़ संकट और रेटिंग एजेंसी की ओर से उसकी रेटिंग कम किए जाने का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी पड़ा है.

सोमवार को बाज़ार में काफ़ी हलचल रही और फिर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 315 अंक नीचे गिरकर 16990 अंक पर बंद हुआ.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी भी 92 अंक नीचे गिरकर 5118 पर बंद हुआ. एशियाई बाज़ारों में हुई नकारात्मक शुरुआत का असर भारतीय शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा.

एक समय तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 500 से ज़्यादा अंक नीचे गिर गया. लेकिन यूरोपीय बाज़ारों की सकारात्मक शुरुआत के बाद सेंसेक्स में उछाल आया और सूचकांक एक बार फिर 17000 के पार चला गया.

कुछ निवेशकों ने इसे मौक़े के रूप में देखा और ख़रीदारी की, जिसका असर शेयर बाज़ार पर पड़ा. लेकिन एक बार फिर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई.

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