भारत समेत एशियाई बाज़ारों में खलबली

निक्केई

आर्थिक स्थिति के बारे में दुनिया भर में चिंता के कारण सोमवार को भारत समेत एशिया के अनेक शेयर बाज़ारों अफ़रा-तफ़री मची हुई है.

जापान के नेक्केई में 2.4 प्रतिशत की गिरावट, हॉंगकॉंग के सूचकांक में चार प्रतिशत, दक्षिण कोरियाई बाज़ार के सूचकांक में पाँच प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है. सेंसेक्स में लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई.

मुंबई शेयर बाज़ार का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भातीय समयानुसार सुबह 10.30 बजे लगभग 515 अंक गिरा कर 16,790 पर पहुँच गया था. बाद में कारोबार के दौरान सेंसेक्स की स्थिति कुछ सुधरी.

जबकि निफ़्टी उस समय भी लगभग डेढ़ सौ अंक गिरकर 5066 पर था.

भारतीय बाज़ार में डीएलएफ़ के शेयर में सात प्रतिशत, टाटा मोटर्स में लगभग छह प्रतिशत, इन्फ़ोसिस और टीसीएस के शेयरों मे पाँच प्रतिशत और टाटा स्टील के शेयर में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.

क्या है रेटिंग एजेंसी - पढ़िए

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर की ओर से अमरीका की क्रेडिट रेटिंग को शुक्रवार को घटा दिया गया था. इसके बाद अमरीकी शेयर बाज़ार में 2008 के वित्तीय संकट के बाद से न्यूयॉर्क के डाओ जोंस सूचकांक में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई थी.

क्रेडिट रेटिंग के मूल्यांकन पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले देश (अमरीका) की माली हालत कैसी है और उसकी उधार लौटाने की क्षमता कितनी है.

बाज़ार के विश्लेषकों का आकलन है कि अगले कुछ हफ़्तों तक दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी.

जी-7, यूरोपीय बैंक की घोषणा

ग़ौरतलब है कि सोमवार को एशियाई बाज़ारों में शुरुआती गिरावट यूरोपीय केंद्रीय बैंक और साथ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि वे यूरोप और अमरीका में सरकारी कर्ज़ की स्थिति के बावजूद वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के हर ज़रूर क़दम उठाएँगे.

यूरोप में इटली और स्पेन विशालकाय सरकारी कर्ज़ की स्थिति से जूझ रहे हैं.

यूरोपीय केंद्री बैंक ख़रीदेगा सरकारी बॉंड - पढ़िए

Image caption जी-7 की बैठक में ब्रिटेन, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका ने आर्थिक चिंताओं को घटाने का प्रयास किया

यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने घोषणा की है कि वह यूरोज़ोन में कर्ज़ से जूझ रहे देशों के सरकारी बॉंड ख़रीदने की प्रक्रिया शुरु करेगा.

एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषक बेन पॉटर ने कहा, "कोई भी (अमरीका की) क्रेडिट रेटिंग घटाए जाने के परिणाम को पूरी तरह नहीं समझ रहा है. इसीलिए बाज़ारों का ये हाल है."

उनका मानना है, "हर किसी की सोच है - पहले बेचो, फिर सवाल पूछो. हमारा मानना है कि संभावना है कि बाज़ारों में निवेशक समझ जाएँगे कि ये प्रतिक्रिया ज़रूरत से ज़्यादा है और दोबारा ख़रीद का दौर शुरु होगा."

एचएसबीसी बैंक के अर्जुन महेंद्रन का मानना है, "ये अचानक बौख़लाहट में हो रही प्रतक्रिया है. दोबारा एशिया में ख़रीद का दौर चलेगा. विकसित देशों से विकासशील देशों के बाज़ारों में निवेश होगा."

निवेशकों में चिंता ये है कि यूरोज़ोन के कर्ज़ के कारण दुनिया दोबारा वित्तीय संकट में फंस सकती है और ये वर्ष 2008 के आर्थिक संकट से भी गंभीर हो सकता है.

इस अनिश्चितता के दौर में सोना की कीमत आसमान पर पहुँच गई है. शुक्रवार को हॉंगकॉंग में जहाँ सोने का बाज़ार 1655.5 - 1656.5 डॉलर प्रति आऊँस पर बंद हुआ था, वहीं सोमवार को ये बढ़कर 1686 - 1687 डॉलर प्रति आऊँस पर खुला.

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