यूरोपीय बाज़ारों का बुरा हाल

  • 9 अगस्त 2011
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एशियाई बाज़ार में भारी गिरावट के बाद यूरोपीय बाज़ार का भी हाल बुरा है. लंदन, जर्मनी और फ़्रांस के बाज़ार औंधे मुंह गिरे. लंदन का एफ़टीएसई 4.1 फ़ीसदी गिरा, जर्मनी का डैक्स 5.7 फ़ीसदी गिरा है जबकि फ़्रांस के सीएसी में 2.4 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

अमरीका की रेटिंग कम किए जाने और कई यूरोपीय देशों में कर्ज़ संकट का असर शेयर बाज़ारों पर पड़ा है. यूरोप में सबसे ज़्यादा बैंकिंग क्षेत्र के शेयर प्रभावित हुए हैं.

सोमवार को अमरीकी शेयर बाज़ार के डाओ जोन्स सूचकांक में अक्तूबर 2008 के बाद हुई सबसे बड़ी गिरावट का एशियाई बाज़ारों में व्यापक असर पड़ा. शुरुआत में तो शेयर 10 फ़ीसदी तक गिर गए.

लेकिन बाद में बाज़ारों में कुछ सुधार आया. जापान का निकेई 1.7 फ़ीसदी गिरकर बंद हुआ तो दक्षिण कोरिया को कोप्सी 3.6 फ़ीसदी गिरा.

भारत में भी मंगलवार को जैसे ही मुंबई शेयर बाज़ार का कारोबार शुरु हुआ. बीएसई एक बार तो 417 अंक नीचे गिर गया. लेकिन बाद में उसमें कुछ सुधार आया. आख़िरकार बीएसई का सेंसेक्स 132 अंकों की गिरावट के साथ 16858 पर बंद हुआ.

जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी 48 अंक नीचे गिरकर 5069 पर बंद हुआ.

सेंसेक्स, निफ़्टी भारी दबाव में

सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भरोसा दिलाने के प्रयासों के बावजूद डाओ जोन्स सूचकांक में 5.6 प्रतिशत और नैसडैक में 6.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति ओबामा ने कहा था, "बाज़ार चढ़ेंगे और गिरेंगे. लेकिन ये अमरीका है. कोई एजेंसी कुछ भी कहे हम हमेशा से ट्रिपल ए रेटिंग के देश थे और हमेशा ही रहेंगे."

क्या है रेटिंग एजेंसी - विस्तार से जानें

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स की ओर से अमरीका की क्रेडिट रेटिंग को शुक्रवार को घटा दिया गया था. क्रेडिट रेटिंग के मूल्यांकन पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले देश की माली हालत कैसी है और उसकी उधार लौटाने की क्षमता कितनी है.

इटली का स्पेन से भी बुरा हाल - कितना है कर्ज़?

सोमवार को अन्य एशियाई बाज़ारों की तरह मुंबई शेयर बाज़ार का सूचकांक बीएसई भी 315 अंक गिरा था. मंगलवार को भी लगभग वही सिलसिला जारी है.

अमरीका, यूरोपीय देशों का कर्ज़

इस पूरी समस्या की जड़ है अमरीका की क्रेडिट रेटिंग का घटना, उससे पहले अमरीकी कर्ज़ पर शुरु हुआ विवाद और अब यूरोप (विशेष तौर पर इटली और स्पेन) के आर्थिक विकास से जुड़ी चिंताएँ.

टीकाकार कैथलीन गैफ़नी का कहना है, "बाज़ार में जो प्रतिक्रिया हो रही है वह विकास के डर से प्रेरित है. निवेशक चिंतित हैं कि यूरोप और अमरीका किस तरह से इतने बड़े कर्ज़ से बाहर आएँगे यदि अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी हो जाती है."

जहाँ कच्चे तेल की कीमत भी गिर रही है, वहीं सोने की क़ीमत आसमान छूने लगी है क्योंकि निवेशक पूँजी वहाँ लगाना चाहते हैं जहाँ ख़तरा कम हो.

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