गिरकर संभला वॉल स्ट्रीट

मोशे रौच 9/11 की सुबह काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे. जब से उन्होंने ब्रॉडवे में कपड़ों की दुकान शुरू की थी, उनका धंधा अच्छा चल रहा था.

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से थोड़ी ही दूरी पर रौच की दुकान थी, जहां वो ऑफ़िसों में काम करने वालों और सस्ते कपड़े ख़रीदने की चाहत रखनेवाले पर्यटकों को सूट बेचा करते थे. लेकिन उस दिन उनकी दुकान खुली नहीं थी.

जब दूसरा विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराया तब तक मोशे भी अपने पड़ोसी कारोबारियों के साथ वहां पहुंच चुके थे. ब्रॉडवे पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी और लोग वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से निकलते घुएं के बादल को हैरानी से देख रहे थे.

मोशे विमान के टकराने से हुई आवाज़ को याद करते हुए कहते हैं, ''ऐसा लगा कोई परमाणु बम विस्फोट हो गया हो. हम वहां खड़े होकर नज़ारा देख रहे थे और जब पहला टावर गिरा तो सभी लोग जान बचाने के लिए भागे.''

उसके बाद मोशे ने दो महीने तक अपनी दुकान नहीं खोली.

छोटा कारोबार

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर लोअर मैनहटन में 16 एकड़ के भूखंड पर बना था. 11 सितंबर को चरमपंथी हमले में हज़ारों लोगों की जान गई और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ध्वस्त हो गया, लेकिन इस हमले ने मैनहटन में चलनेवाली वाणिज्यिक गतिविधियों को भी बुरी तरह प्रभावित कर दिया.

मोशे रौच जब दो महीने बाद अपनी दुकान में पहुंचे तो सब कुछ अपनी जगह पर था लेकिन कपड़े ख़राब हो चुके थे. बीमा कंपनी से उनके नुक़सान की केवल आधी भरपाई हो सकी और मोशे का कारोबार हमेशा के लिए बंद हो गया.

हालांकि हमले के कुछ सालों बाद ग्राउंड ज़ीरो (हमले की जगह) देश में पर्यटन की सबसे महत्वपूर्ण जगह बन गई और मोशे का कारोबार एक बार फिर धीरे-धीरे फलने-फूलने लगा. थोड़े सालों बाद मोशे की दुकान वीआईपी मेन्स सूट्स हमले के पहले के दौर की तरह ही चल पड़ी. मोशे की इस छोटी सी दुकान की कहानी के ज़रिए उस दौर में पूरे शहर की आर्थिक परेशानियों को समझा जा सकता है.

9/11 के बाद न्यूयॉर्क की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. न्यूयॉर्क शहर के नियंत्रक के मुताबिक़ 2001 की आख़िरी तिमाही में अचानक शहर की अर्थव्यवस्था सिकुड़ने लगी.

पहले इसमें एक फ़ीसदी की गिरावट आई लेकिन 2002 की पहली तिमाही में इसमें चार फ़ीसदी की गिरावट आई. अगले दो साल तक ऐसी ही स्थिति बनी रही और फिर इसके सुधरने का दौर शुरू हुआ.

2004 तक आते-आते न्यूयॉर्क की अर्थव्यवस्था एक बार फिर पांच फ़ीसदी प्रति तिमाही की रफ़्तार से विकास करने लगी.

बेहद शक्तिशाली

अल क़ायदा के आर्थिक लक्ष्य न्यूयॉर्क शहर से भी ज़्यादा थे. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर अमरीका की वित्तीय गतिविधियों के केंद्र वॉल स्ट्रीट से कुछ ही दूरी पर है.

हमले के बाद शेयर बाज़ार कई दिन तक बंद रहे और जब दोबारा खुले तो शेयर की क़ीमतें तेज़ी से गिरीं.

लेकिन सबकुछ तेज़ी से पटरी पर लौट आया. वॉल स्ट्रीट के बड़े आर्थिक संस्थानों को प्रभावित कर पाने में चरमपंथी क़ामयाब नहीं हो सके.

अगर 2001 के बाद के सालों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो इसका अंदाज़ा हो जाता है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ 1990 में अमरीकी अर्थव्यवस्था में वित्त और बीमा उद्योग की हिस्सेदारी छह फ़ीसदी की थी. 2001 तक ये बढ़कर 7.7 फ़ीसदी हो गई.

हमले के बाद के सालों में भी वॉल स्ट्रीट का आर्थिक स्वास्थ्य बेहतर होता गया और आज वित्त और बीमा क्षेत्र का अमरीकी सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 8.4 फ़ीसदी है.

इन आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि चरमपंथी अपने इरादे में क़ामयाब नहीं रहे थे.

उन्होंने हज़ारों लोगों को भले ही मौत की नींद सुला दिया था लेकिन अमरीकी अर्थव्यवस्था के सबसे पड़े प्रतीक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को गिराकर देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने का उनका मक़सद पूरा नहीं हो सका था.

हमला और संकट

इस समय अमरीकी अर्थव्यस्था मंदी के दौर से गुज़र रही है. दस साल पहले जब सितंबर के हमले हुए थे तब भी हालात इतने ख़राब नहीं हुए थे जितने आज हैं.

देश की अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से उबारने में सरकार को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि 10 साल पहले हुए सितंबर के हमले और आज की आर्थिक मंदी के बीच गहरा रिश्ता है.

कम ब्याज दर पर होम लोन के लंबे सिलसिले ने समस्या पैदा कर दी जिसकी परिणति मौजूदा आर्थिक मंदी के रूप में हुई.

लेकिन वॉल स्ट्रीट आज भी अमरीकी अर्थव्यवस्था का सिरमौर बना हुआ है और इसकी वजह ये है कि अमरीकी करदाताओं ने इस पर अपना भरोसा बनाए रखा है.

नए टावर

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Image caption न्यूयॉर्क में पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं

ध्वस्त वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जगह अब नए टावर खड़े हो गए हैं. ग्राउंड ज़ीरो के आस पास की इमारतें समय के साथ ऊंची होती जा रही हैं. मैनहटन में कारोबार करनेवाले लोग पर्यटकों की वजह से पैसे बना रहे हैं.

हालांकि ये भी सच है कि यहां की आर्थिक समृद्धि देश के और हिस्सों तक नहीं पहुंच सकी है.

मोशे रौच की दुकान चल रही है लेकिन एक अंतर आ गया है जिसकी ओर संकेत करते हुए वो कहते हैं, ''लोग यहां बड़ी संख्या में आते हैं लेकिन पहले की तरह खुलकर ख़र्च नहीं करते.''

मोशे को उम्मीद है कि मैनहटन में आर्थिक समृद्धि की पहले वाली रौनक़ एक बार फिर लौटेगी.

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