क्या चीन बनेगा इटली का संकट मोचन

Image caption साल के अंत तक 68 अरब डॉलर के सरकारी खर्च में कटौती होगी

इटली के अधिकारीयों ने इस बात की पुष्टि की है कि इटली के विशाल क़र्ज़ के संदर्भ में उन्होंने चाइनीज़ इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (सीआईसी) के प्रतिनिधियों से रोम में चर्चा की है.

इटली का राष्ट्रीय क़र्ज़ उसके सकल घरेलु उत्पाद का 120 प्रतिशत है और ये यूरोज़ोन के कुल क़र्ज़ का 23 प्रतिशत है.

इस तरह इटली का कुल क़र्ज़ 1.9 खरब यूरो है और उसे इस साल के अंत तक अपने खर्चे में 68 अरब यूरो घटाने की ज़रूरत है.

दोनों ही पक्षों ने अपनी बातचीत के बाद उसका विस्तृत विवरण देने से इनकार कर दिया है. लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि इटली को उम्मीद है चीन बड़ी संख्या में उसके सरकारी बॉंड खरीदेगा और इतालवी कंपनियों में पूँजी निवेश भी करेगा.

घटाना है अरबों का सरकारी खर्च

इटली के शेयर संकट पर और इटली-चीन बातचीत पर पर्यवेक्षक कयास लगा रहे हैं.

चाइनीज़ इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन की मालिक चीन की सरकार है और उसकी संपत्ति लगभग 400 अरब डॉलर है.

ये ख़बर उस समय आई है जब इटली के लिए विश्व बाज़ार के क़र्ज़ उठाने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है. इटली ने हाल में 3.85 अरब यूरो के पांच साल के बॉंड जारी किए थे लेकिन इन पर ब्याज दर 4.93 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गई है.

पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना के पूर्व उप गवर्नर और अब वरिष्ठ सरकारी अधिकारी वू शाओलिंग ने मंगलवार को कहा, "बाज़ार में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए चीन यूरोप से साथ मिलकर काम करने को तैयार है. हम यूरोप मं उठाए जा रहे क़दमों का समर्थन करते हैं और यूरो की स्थिरता के पक्षधर हैं."

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर के अनुसार, "पश्चिमी सरकारों को क़र्ज संकट से बचाने के लिए पैसा देने में चीन की बढ़ती भूमिका उसके बढ़ते आर्थिक प्रभाव का संकेत है. चीन के पास पहले से ख़ासे अमरीकी सरकारी बॉंड हैं."

चीन के पास, पश्चिमी देशों समेत पूरी दुनिया के देशों के मुक़ाबले में विशाल विदेशी मुद्रा भंडार हैं. चीन के पास तीन ख़रब डॉलर के भी अधिक विदेशी मुद्रा के भंडार हैं.

इटली की संसद इस सप्ताह उस पैकेज पर वोट करेगी जिसके तहत सरकारी ख़र्च को कम किया जाना है. इटली के मंत्री ट्रीमॉंटी ने पहले ही संकेत दिए हैं भविष्य में भी सरकारी ख़र्च घटाना पड़ सकता है.

इटली कई बड़ी सरकारी ऊर्जा कंपनियों - ऊर्जा कंपनी एनएल और तेल व गैस कंपनी एनई - में भी विनिवेश करने पर विचार कर रही है.

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