शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट

  • 3 अक्तूबर 2011
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Image caption बंबई स्टाक एक्सचेंज में पिछले तीन महीनों से लगातार गिरावट हो रही है.

यूरोज़ोन ऋण संकट का असर अब भारतीय बाज़ारों पर भी दिखने लगा है और सोमवार को बांबे स्टाक एक्सचेंज में दो प्रतिशत की गिरावट आई है.

उद्योग जगत की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को इस गिरावट का सबसे अधिक नुकसान हुआ है जबकि आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भी ख़ासी गिरावट देखी गई है.

बंबई स्टॉक एक्सचेंज़ में सोमवार को 302 अंकों की गिरावट देखी गई है. वैसे दिन में एक समय सेंसेक्स 333 अंक नीचे चला गया था.

पिछले तीन महीनों में शेयर बाज़ार में 12.8 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई है. उल्लेखनीय है कि 2008 में लेहमैन ब्रदर्स के दिवालिया होने के बाद शेयर बाज़ारों में गिरावट का दौर जारी है लेकिन इन तीन महीनों में ये गिरावट सबसे अधिक दिखी है.

सितंबर महीने में मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के आकड़े आए थे जिसमें साफ था कि इस सेक्टर में वृद्धि नगण्य है.

इसके अलावा विदेशी पूंजी निवेश भी धीरे धीरे कम होता जा रहा है जिसके कारण बाज़ार की स्थिति ठीक नहीं है.

इसके अलावा पिछले हफ्ते माइनिंग विधेयक के आने के बाद भी बाज़ार गिर गया था.

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की नीतिया उद्योग विरोधी हैं और इसका असर बाज़ार पर देखा जा सकता है.

बढ़ती हुई मंहगाई सरकार के लिए अलग समस्या बनी हुई है. महंगाई के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर का प्रदर्शन ख़राब होता जा रहा है और मारुति को छोड़कर कोई भी कंपनी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है.

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