मारुति के मानेसर प्लांट में फिर काम ठप

Image caption मारुति सुज़ुकी के कर्मचारियों के समर्थन में सुज़ुकी के दो प्लांट्स के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं.

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी के मानेसर स्थित प्लांट में कर्मचारियों और प्रबंधन का समझौता टूटने के बाद काम पूरी तरह से बंद है.

प्लांट के बाहर एक तम्बू में सैंकड़ों कर्मचारी बैठे हैं और गेट से अंदर झांकने पर उतनी ही तादाद फ़ैक्टरी के अंदर दिखाई देती है.

कर्मचारियों का आरोप है कि मारुति प्रबंधन 1500 अस्थायी कर्मचारियों को काम पर वापस नहीं ले रही है और जबतक ये नहीं होगा तब तक फ़ैक्टरी के अंदर मौजूद स्थायी कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे.

वहीं प्रबंधन का कहना है कि एक महीने तक प्लांट में काम बाधित होने की वजह से सभी अस्थायी कर्मचारियों को एकसाथ वापस लेना संभव नहीं था और ये बात उनके ठेकेदार को समझा दी गई थी.

समझौता

Image caption मारुति के मानेसर प्लांट के अंदर ही कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं और कामकाज पूरी तरह ठप्प है.

मारुति के जनसंपर्क अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि, "ये हड़ताल अस्थायी कर्मचारियों के लिए नहीं बल्कि उन 44 निलंबित कर्मचारियों को वापस रखने की मांग के साथ बुलाई गई है जिन्हें पिछली हड़ताल के समझौते के तहत निलंबित किया गया था."

इसलिए ये उस समझौते का उल्लंघन है और अब बातचीत का कोई मतलब नहीं बचा.

इससे पहले मानेसर प्लांट में एक महीने तक हड़ताल रही थी जो एक अक्तूबर को प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच एक समझौते के बाद ख़त्म हुई.

समझौते के तहत कर्मचारियों से एक लिखित आश्वासन पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें उन्होंने अनुशासन से काम करने, अपनी किसी भी मांग के लिए काम की रफ़्तार कम ना करने और हड़ताल ना करने की बात मानी थी. साथ ही 44 कर्मचारियों को निलंबित किया गया था.

तीन अक्तूबर को काम दोबारा शुरू हुआ लेकिन चार दिन बाद ही, कर्मचारी फिर हड़ताल पर चले गए.

‘एकता तोड़ने की कोशिश’

मारुति के हड़ताली कर्मचारियों का दावा है कि पिछली हड़ताल ख़त्म होने के बाद 1500 अस्थायी कर्मचारियों को काम पर वापस ना लिए जाने के अलावा स्थायी कर्मचारियों के काम के वर्कस्टेशन यानी जगह बदल दी गई है, साथ ही प्लांट तक आने के लिए दी जा रही बस सेवा भी बंद कर दी गई है.

एक निलंबित कर्मचारी प्रदीप के मुताबिक़ ये मारुति प्रबंधन की ओर से यूनियन बनाने की कोशिशों का जवाब है.

मारुति के कर्मचारी अपने एक नए कर्मचारी संगठन को मान्यता दिलाने की मांग करते रहे हैं और उनका कहना है कि मारुति के गुड़गांव प्लांट से काम करने वाली यूनियन, ‘मारुति उद्योग कर्मचारी यूनियन’ उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती है.

सुशील कुमार ने बीबीसी को बताया, "प्रबंधन अस्थायी कर्मचारियों और स्थायी कर्मचारियों की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहा है लेकिन हम अपनी यूनियन, मारुति सुज़ुकी कर्मचारी यूनियन को मानते हैं अब काम पर जाएंगे तो एक साथ वर्ना नहीं."

मारुति के कर्मचारियों के साथ सुज़ुकी कंपनी के अन्य कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं.

मानेसर स्थित सुज़ुकी पावरट्रेन कंपनी के मनोज कुमार ने बीबीसी से कहा, “प्रबंधन ने वायदा किया लेकिन अस्थायी कर्मचारियों को वापस नहीं लिया, उसके बाद बाउंसर बुलवाकर हमारे साथियों के साथ मारपीट की, इसी से हमें हिम्मत मिली की संघर्ष करें.”

उनके साथ काम करने वाले बलिंदर सिंह ने कहा, “अब चाहे छह साल लग जाएं चाहे 20 साल लग जाएं हम यहां से हटेंगे नहीं, अपनी मांगे मनवाकर दम लेंगे.”

मारुति के उत्पादन पर असर

Image caption अस्थाई कर्मचारी एक तंबू के नीचे प्लांट के बाहर प्रदरेशन कर रहे हैं.

मारुति प्रबंधन का दावा है कि कुछ कर्मचारियों ने फ़ैक्टरी में तोड़-फोड़ की है और काम जारी रखने की इच्छा वाले कर्मचारियों को भी हड़ताल पर जाने के लिए धमकाया है.

मारुति प्रबंधन का आरोप है कि कर्मचारियों ने उनके कई अधिकारियों के साथ गुंडागर्दी की और बीच-बचाव के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी.

वहीं हड़ताली कर्मचारियों के साथ सुज़ुकी के दो अन्य प्लांट के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं. इसके कारण कार के पार्ट्स नहीं बन पा रहे और मारुति के गुड़गांव प्लांट में उत्पादन पर असर पड़ रहा है.

मारुति के मुताबिक रोज़ाना 2,800 गाड़ियां तैयार करने वाले इस प्लांट में सोमवार को 1,800 और मंगलवार को 1,000 गाड़ियां ही बन पाईं.

मारुति प्रबंधन का कहना है कि अब वो श्रम आयुक्त के ज़रिए ही मसले को सुलझाएंगे और कर्मचारियों से बातचीत नहीं करेंगे.

वहीं कर्मचारियों का दावा है कि सुज़ुकी, होंडा और रिको जैसी बड़ी कंपनियों समेत मानेसर, गुड़गांव और धारुहेड़ा स्थित क़रीब 20 प्लांट्स के कर्मचारी संगठन उनके साथ हैं और बुधवार को अपनी-अपनी मैनेजमेंट को ज्ञापन देंगे.

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