जी-20: इस बैठक में कहा अगली बैठक निर्णायक होगी

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Image caption आईएमएफ़ के कोष को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई

पेरिस में जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में यूरोज़ोन के वित्तीय संकट पर चर्चा के बाद निष्कर्ष निकला है कि अगले हफ़्ते यूरोपीय संघ की बैठक में 'निर्णायक क़दम' उठाए जाएँगे.

यूरोप में जहाँ ग्रीस, पुर्तगाल और आयरलैंड को वित्तीय मदद दी गई है, वहीं इटली-स्पेन विशालकाय राष्ट्रीय क़र्ज़ से जूझ रहे हैं.

फ़्रांस के वित्त मंत्री फ़्रैंकिओ बारोएँ ने कहा, "यूरोपीय संघ की बैठक मे स्पष्ट जवाब दिए जाएँगे. केंद्रीय बैंक अन्य बैंको को पैसा उपलब्ध कराते रहेंगे."

जी-20 देशों के बयान में कहा गया है कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को पर्याप्त संसाधन देने के बारे में प्रतिबद्ध हैं.

'विकसित देशों की कमज़ोरी का विकासशील देशों पर असर'

ब्रितानी वित्त मंत्री जॉर्ज ओसबोर्न ने कहा, "कई बार ऐसा लगता है कि हम बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं...मैं आश्वस्त हूँ कि अगले कुछ हफ़्तों में हल निकल आएगा."

जहाँ कुछ देशों ने आईएमएफ़ के संसाधन बढ़ाने की बात कही ताकि यूरोप को भी इसका फ़ायदा हो, वहीं ओसबोर्न ने कहा कि आईएमएफ़ का फ़ायदा तभी होगा यदि इसका फंड यूरोज़ोन के लिए ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को बेहतर करने कि लिए इस्तेमाल होता है.

लेकिन अमरीकी वित्त मंत्री टिम गाइट्नर को कुछ आपत्तियाँ थी और उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि फ़्रांस और जर्मनी को और काम करने की ज़रूरत है.

उधर अंतरराष्ट्रीय मुद्र कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लैगार्ड ने कहा, "उभर रही अर्थव्यवस्थाएँ जिनके विकास से विश्व की अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट के दौर में निकल रही रही थी, अब विकसित अर्थव्यवस्थाओं की कमज़ोरी के कारण प्रभावित हो रही है. असल बात यह है कि पिछले तीन हफ़्तों में स्थिति बेहतर होने की जगह ख़राब हुई है. हमने उभर रही अर्थव्यवस्थाओं से सुना था कि वे इस ख़तरे के फ़ैलने से चिंतित हैं. "

उधर भारत के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी कुछ इसी तरह की चिंता जताई. उन्होंने कहा है कि इस संकट का असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है.

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