मारुति में कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म

मारुति संयत्र
Image caption इस हड़ताल के कारण मारुति को लगभग नौ सौ करोड़ रूपए का नुक़सान हुआ है.

मारुति सुज़ुकी इंडिया के मानेसर संयंत्र में पिछले 15 दिनों से जारी कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार सुबह को ख़त्म हो गई.

सुज़ुकी पावरट्रेन और सुज़ुकी मोटरसाइकिल में भी हड़ताल ख़त्म हो गई है.

मारुति कंपनी प्रबंधन, कर्मचारी और हरियाणा सरकार के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते के बाद यह हड़ताल ख़त्म करने की घोषणा की गई. समझौते के मुताबिक़ प्रबंधन 64 स्थाई कर्मचारियों को वापस लेने पर सहमत हो गया, लेकिन अन्य 30 कर्मचारियों का निलंबन जारी रहेगा.

सूत्रों ने कहा कि जिन कर्मचारियों के मामले में आरोप गंभीर नहीं थे, कंपनी प्रबंधन ने ऐसे कर्मचारियों को बहाल करने का निर्णय किया. 64 कर्मचारियों के मामले में आरोप गंभीर नही थे इसलिए कंपनी उनकी बहाली पर तैयार हो गई लेकिन अन्य 30 कर्मचारियों के मामले में आरोप गंभीर प्रकृति के पाए गए और इसलिए कंपनी ने उन कर्मचारियों का निलंबन बरक़रार रखने का फ़ैसला किया.

इसके अलावा मारुति प्रबंधन ने 1200 अस्थाई कर्मचारियों को बहाल करने की बात भी स्वीकार कर ली है.

जहां तक अस्थाई कर्मचारियों का संबंध है, मारुति सुज़ुकी इंडिया मानेसर संयंत्र में चल रहे विस्तार के मद्देनज़र कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिए उन्हें वापस नौकरी पर रखेगी.

उल्लेखनीय है कि मानेसर संयंत्र में करीब 1200 अस्थाई कर्मचारियों एवं 44 स्थाई कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर कर्मचारी सात अक्तूबर से हड़ताल पर थे.

इससे पहले 33 दिन चली हड़ताल को ख़त्म करने के लिए एक अक्तूबर को हुए समझौते के बाद इन कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था.

शुक्रवार को हुए समझौते के मुताबिक़, कर्मचारियों को हड़ताल के दौरान काम नहीं करने पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा.

समझौते के अनुसार कर्मचारियों की बहाली के अलावा शिकायतों के निस्तारण एवं श्रम कल्याण के लिए दो समितियों का गठन करने पर भी सहमति बनी है, जिससे संयंत्र में मैत्रीपूर्ण कार्य का वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.

कंपनी के मुताबिक़ बुधवार को सुबह 11 बजे हरियाणा सरकार की मध्यस्थता में कंपनी प्रबंधन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच बातचीत की शुरूआत हुई थी.

हरियाणा सरकार की तरफ़ से उपायुक्त डीसी मीणा और श्रम विभाग को दो अधिकारी इस बातचीत में शामिल थे.

बुधवार रातभर और फिर गुरूवार को दिन भर और देर रात तक बातचीत जारी रही और फिर आख़िरकार शुक्रवार की सुबह दोनों पक्षों में सहमति बन गई.

इतने लंबे समय तक चली बातचीत के दौरान कई बार दोनों पक्ष समझौते के बहुत क़रीब पहुंच गए थे लेकिन फिर किसी किसी बात पर सहमति नहीं बन पा रही थी.

लेकिन हरियाणा सरकार और कंपनी प्रबंधन तथा हड़ताली कर्मचारी इस बात के दृढ़ निश्चय कर चुके थे कि वे किसी नतीजे पर पहुंचने के बाद ही बातचीत ख़त्म करेंगे.

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