'भारत पर पड़ रहा है यूरोपीय संकट का असर'

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भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि यूरोप और अमरीका में छाई मंदी और ऋण संकट का भारत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.

नई दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद की सभा को संबोधित करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भले ही विकास कुछ धीमा हुआ है लेकिन मध्यम अवधि के विकास की संभावना बरकरार है.

हालांकि प्रणब मुखर्जी ने स्वीकार किया कि यूरोप और अमरिका में मंदी से छाया आर्थिक संकट भारत को भी प्रभावित कर रहा है.

वर्ष 2010-11 में 8.5 प्रतिशत की विकास दर दर्ज करने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष के दौरान 8 फ़ीसदी की विकास दर दर्ज करने की उम्मीद है.

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने धीमी होती विकास दर की रफ्तार पर चिंता व्यक्त की लेकिन ज़ोर दिया कि राष्ट्र को नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए.

अगली योजना के दौरान 9 फ़ीसदी विकास के लक्ष्य का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस सवाल पर मनन भी ज़रूरी है कि धीमी होती अर्थव्यवस्था की रफ्तार में क्या यह संभव है.

उधर ब्रसेल्स में शिखर वार्ता के लिए पहुंचे ब्रिटेन के चांसलर जॉर्ज ओसबोर्न ने कहा है कि यूरोज़ोन ऋण संकट सारे यूरोप के लिए ख़तरे की घंटी है.

यूरोज़ोन के सदस्य देशों के वित्त मंत्री आर्थिक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए बैठक कर रहे हैं.

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