विश्व में निराशा, भारतीय ख़रीदार आश्वस्त

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Image caption अमरीका और यूरोप में उपभोक्ताओं ने ख़र्च के लिए पर्याप्त धन न होने की बात कही.

वित्तीय क्षेत्र में शोध करनेवाली कंपनी नीलसन के एक सर्वे के अनुसार दुनियां भर के 60 फ़ीसद से अधिक उपभोक्ता वर्तमान आर्थिक स्थिति को कमज़ोर आंकते हैं और मानते हैं कि ये ख़र्च करने के लिए उपयुक्त समय नहीं है.

सर्वे में दुनियां की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था अमरीका के तीन में से एक उपभोक्ता ने कहा कि उनके पास ख़र्च करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है.

लेकिन इसके उलट भारत में ख़रीदारों का विश्वास बहाल है. ये लगातार सातवीं बार है जब विश्व भर में अर्थव्यवस्था में कमज़ोरी के आकलन के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं ने सकारात्मक रूख़ का इज़हार किया है.

हालांकि सर्वेक्षण के दौरान भारत में पहले के मुक़ाबले. यानि दूसरी तिमाही की तुलना में ख़रीदारियों को लेकर उत्साह थोड़ा कम देखने को मिला है. यानि, अर्थव्यवस्था को लेकर भारतीय उपभोक्ता पहले जितना आशान्वित नहीं हैं. लेकिन तैयार की गई सूची में गिरावट की ये दर बहुत कम है.

सऊदी अरब में हालात पहले से बेहतर हुए हैं और उपभोक्ताओं के विश्वास के संदर्भ में वो वैश्विक उपभोक्ता विश्वास सूची में भारत के क़रीब पहुंच रहा है.

सर्वेक्षण में ये बात सामने आई कि उपभोक्ताओं की पहली चिंता अर्थव्यवस्था को लेकर है. नौकरियों की सुरक्षा उनकी परेशानी का दूसरा बड़ा कारण है.

सर्वे के आधार पर तैयार नीलसन ग्लोबल कंज़्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स में पाया गया कि जहां विकसित देशों में मौजूद ख़रीदारों में निराशा का भाव है वहीं तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं जैसे ब्राज़ील और सऊदी अरब में लोगों में विश्वास का भाव पहले की तुलना में बढ़ा है.

इस तिमाही का ग्लोबल कंज़्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स 88 आंका गया. इस सूची के 100 अंको से नीचे जाने का मतलब है कि लोग आनेवाले दिनों में अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक भाव रखते हैं.

नीलसन के केमब्रिज ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री वेंक्टेश बाला ने कहा, "तीसरी तिमाही की अवधि वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाज़ारों के लिए चुनौतीपूर्ण थी. अमरीका में बेरोज़गारी ज्यों की त्यों बनी हुई है और यूरो क्षेत्र में उपजे ऋण संकट की स्थिति बिगड़ती जा रही है."

यूरोपीय देश

ये सर्वेक्षण 56 देशों में 28,000 उपभोक्ताओं के बीच 30 अगस्त और 16 सितंबर के बीच किया गया. जिसमें ये बात सामने आई कि विश्व भर में 64 प्रतिशत उपभोक्ता मानते हैं कि ये समय ख़र्च करने के लिए ठीक नहीं है.

सर्वेक्षण से पता चला है कि अगर उपभोक्ताओं को बजट में तंगी का सामना करना पड़ता है तो वे कपड़े ख़रीदने, बाहर खाने और इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों पर किए जानेवाले ख़र्च में सबसे पहले कटौती करते हैं.

यूरो क्षेत्र, खा़सतौर पर, फ्रांस में उपभोक्ताओं की मनोदशा कमज़ोर रही. यूरो क्षेत्र में हाल के दिनों में ऋण संकट और गहराया है. हंगरी के उपभोक्ताओं की मनोदशा इनमें सबसे कमज़ोर है.

यूरोप के पांच निवासियों में से एक का कहना था कि उनके पास किसी अतिरिक्त ख़र्च के लिए नक़दी नहीं है. हालांकि उत्तरी अमेरिका के तीन में एक की तुलना में यहां दर्ज किया गया प्रतिशत बेहतर था.

जर्मनी में दूसरे यूरोपीय देशों और अमरीका की तुलना में स्थिति बेहतर थी. लेकिन दूसरी तिमाही के मुक़ाबले अमरीका की तरह उसका आंकड़ा भी नीचे गया है.

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