ग्रीस में जनमत संग्रह, बाज़ारों में भूचाल

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Image caption प्रधानमंत्री पापैंद्रो के फ़ैसले का विपक्षी दलों, कम्युनिस्टों ने विरोध किया

ग्रीस के क़र्ज़ संकट देश में जनमत संग्रह के फ़ैसले से यूरोज़ोन में फिर अफ़रा-तफ़री मच गई है और सेंसेक्स समेत एशियाई और यूरोपीय बाज़ार गिरे हैं.

हाल में ग्रीस के क़र्ज़ संकट पर यूरोज़ोन की विशेष बैठक में सहमति बनी थी लेकिन अब यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था पर फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

पिछले हफ़्ते यूरोपीय संघ के नेता ग्रीस को 140 अरब डॉलर का क़र्ज़ देने पर सहमत हुए थे और ग्रीस के आधे क़र्ज़ को माफ़ करने पर भी फ़ैसला हुआ था. ग्रीस को क़र्ज़ देने वाले यूरोप के निजी बैंकों को इस आधे क़र्ज़ पर घाटा बर्दाश्त करना होगा.

लेकिन ग्रीस के प्रधानमंत्री जॉर्ज पापैंद्रो के पूरे मुद्दे और सरकारी ख़र्च में कटौतियों पर जनमतसंग्रह की इजाज़त देने से ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया के साथ-साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स में गिरावट हाई है.

मंगलवार को यूरोप में कारोबार के दौरान लंदन के फ़ुट्सी में 2.9 प्रतिशत, जर्मनी के फ़ैंकफ़र्ट में 4.4 प्रतिशत, फ़्रांस के शेयर बाज़ार में 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है.

पर्यवेक्षकों के अनुसार जनमतसंग्रह से पूरे यूरोज़ोन संकट पर बनी सहमति पटरी से उतर सकती है.

सर्वेक्षण में लोग कटौतियों के विरुद्ध

ग्रीस में विपक्षी दलों ने इस क़दम के बाद जल्द चुनाव कराए जाने की मांग की है.

ग्रीस के प्रधानमत्री पापैंद्रो ने देश की सत्ताधारी सोशलिस्ट पार्टी की एक बैठक को बताया, "ग्रीस का क़र्ज़ 140 अरब डॉलर घटाने के लिए प्रस्तावित पैकेज पर देश की जनता अंतिम निर्णय लेगी. ग्रीस की जनता जो आदेश देगी, हम सभी उसी का पालन करेंगे."

चाहे जनमतसंग्रह की कोई अंतिम तिथि की घोषणा नहीं हुई है लेकिन ये माना जा रहा है कि जनमतसंग्रह अगले साल की शुरुआत में हो सकता है.

ग्रीस में हुए सर्वेक्षणों के अनुसार अधिकतर लोग कटौतियों के पक्ष में नहीं हैं.

ग्रीस के रूढिवादी विपक्ष ने प्रधानंत्री के फ़ैसले को ख़तरनाक बताया है जबकि कम्युनिस्टों ने इसे 'ब्लैकमेल' की संज्ञा दी है.

ग्रीस में पहले ही कटौतियों के विरोध में बड़े-बड़े प्रदर्शन हुए हैं.

बीबीसे के यूरोप संपादक गेविन हेविट के अनुसार, "ग्रीस के प्रधानमंत्री पापैंद्रो बहुत बड़ा जुआ खेल रहे हैं. उनका तर्क होगा कि ताज़ा समझौता ग्रीस के राष्ट्रीय हित में है और उसके बिन ग्रीस क़र्ज़ चुकाने में चूक जाएगा और वो विनाश की स्थिति होगी. वे देशभक्ति को अपने अभियान का आधार बनाएँगे. लेकिन हाल में ग्रीस में मैंने पाया कि अनेक लोग क़र्ज़ चुकाने में चूक और फिर अफ़रा-तफ़री को सालों की दिक्कतों से बेहतर मानते हैं."

ग्रीस के अनेक लोगों का मानना है कि यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आदेशों पर कटौतियाँ तय करने से सरकार अपनी हद को पार कर गई है.

बाज़ारों में खलबली

ग्रीस की जनमत संग्रह की घोषणा का विश्व के बाज़ारों पर बुरा असर पड़ा है.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसक्स 224 अंक गिरा है यानी 1.27 की गिरावट दर्ज हुई है. निफ़्टी में भी 1.29 प्रतिशत यानी 68.65 अंकों की गिरावट दर्ज हुई है.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया का बाज़ार 1.5 प्रतिशत गिरा, सिंगापोर का एसटीआई 0.68 नीचे चल रहा था, जापान का निक्केई 1.7 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कोराबार में 0.66 प्रतिशत नीचे चल रहा था.

दरअसल सोमवार से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. यूरोप में शेयर बाज़ार लगभग तीन प्रतिशत नीचे गिरे थे और डॉलर-पाउंड के मुकाबले में यूरो 1.5 प्रतिशत गिरा था.

मंगलवार को भी यूरोप में कारोबार के दौरान लंदन के फ़ुट्सी में 2.9 प्रतिशत, जर्मनी के फ़ैंकफ़र्ट में 4.4 प्रतिशत, फ़्रांस के शेयर बाज़ार में 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है.

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