पीपीएफ खाते पर बढ़ी ब्याज़ दर

Image caption पीपीएफ खाते पर मिलने वाली ब्याज दर को आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 8.6 प्रतिशत कर दिया गया है.

महंगाई से त्रस्त डाकघर और जन भविष्य योजना जैसी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों के लिए अच्छी खबर है.

केंद्र सरकार ने छोटे निवेशकों और बचतकर्ताओं के लिए पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानि पीपीएफ खाते पर मिलने वाली ब्याज दर को आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 8.6 प्रतिशत कर दिया है.

साथ ही पीपीएफ योजना में आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत कर छूट के दायरे में आने वाले निवेश की सीमा को भी 70 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है.

बढ़ी ब्याज दरें एक दिसंबर से

जन भविष्य योजना यानि पीपीएफ में निवेश की बढ़ी सीमा चालू वित्त वर्ष से प्रभावी हो जाएगी और इस पर बढ़ी ब्याज दर आगामी एक दिसंबर से लागू हो जाएंगी.

इसके अलावा अब हर वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर को एक अप्रैल से पहले अधिसूचित कर दिया जाएगा.

अन्य बचत योजनाओं की नई ब्याज दरें इनकी अधिसूचना जारी होने के दिन से लागू होंगी.

पीपीएफ से हासिल किए गए कर्ज़ पर ब्याज दर को सालाना एक फ़ीसदी से बढ़ाकर दो फ़ीसदी कर दिया गया है.

डाक घर बचत खाते पर चार फ़ीसदी ब्याज

सरकार ने डाक घर बचतखाते पर मिलने वाले ब्याज दर में आधा फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी की है. पोस्ट ऑफिस बचत खाते पर ब्याज दर साढ़े तीन फ़ीसदी से बढ़ाकर चार फ़ीसदी कर दी गई है.

मियादी जमा यानि एफडी पर ब्याज दर में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी एक वर्ष की परिपक्वता वाली एफडी पर की गई है. इसकी मौजूदा ब्याज दर को 6.25 से बढ़ाकर 7.7 फ़ीसदी कर दिया गया है.

एमआईएस और एनएससी की परिपक्वता अवधि अब पाँच साल

मासिक आय योजना यानि एमआईएस और राष्ट्रीय बचत पत्र यानि एनएससी की परिपक्वता अवधि को छह साल से घटाकर अब पांच साल कर दिया गया है.

साथ ही मासिक आय योजना पर मिलने वाले ब्याज को 8.2 फ़ीसदी और राष्ट्रीय बचत पत्र मिलने वाले ब्याज को 8.4 फ़ीसदी तक बढ़ा दिया गया है.

सरकार अब दस वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले नए एनएससी को निवेशकों के लिए लाएगी. इस पर 8.7 फ़ीसदी ब्याज मिलेगा.

लेकिन किसान विकास पत्र खरीदने वालों के लिए बुरी ख़बर ये है कि अब इसे बंद कर दिया जाएगा.

श्यामला गोपीनाथ समिति

पिछले साल सरकार ने राष्ट्रीय छोटी बचत योजनाओं की समीक्षा के लिए रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

इस समिति ने छोटी बचत पर ब्याज दरों को बाज़ार के अनुरूप बनाने और डाकघर के बचत खातों में ब्याज की दर को बैंकों के बराबर लाने की सिफ़ारिश की थी.

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