चीन की नीतियों से धैर्य टूट रहा है: ओबामा

  • 13 नवंबर 2011
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Image caption सम्मेलन के दौरान ओबामा और चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की मुलाक़ात हुई है

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से कहा है कि अमरीका चीन की आर्थिक नीतियों को लेकर बहुत परेशान है और उसका धैर्य टूट रहा है.

हवाई में हो रहे एशिया प्रशांत सम्मेलन में ओबामा ने ये बात कही है. सम्मेलन में ओबामा ने एशिया प्रशांत देशों को मिलाकर एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने की योजना का खाका भी पेश किया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसे बड़े सम्मेलनों में आम तौर पर राष्ट्राध्यक्ष इतनी कठोरता से अपनी बात नहीं रखते लेकिन ओबामा ने अपनी बात चीन के राष्ट्रपति तक पहुंचाने में कोई लाग लपेट नहीं की.

अमरीका लगातार कहता रहा है कि चीन ने अपनी मुद्रा युआन का अवमूल्यन कर रखा है जिससे चीन को व्यापार में काफी फायदा होता है.

व्यापार योजना

इसी सम्मेलन में अपने भाषण में ओबामा ने कहा कि एशिया प्रशांत के नौ देश नए व्यापार सौदे की रुपरेखा पर तैयार हो गए हैं जिसे ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप नाम दिया गया है.

इस सौदे के ज़रिए इस क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे विश्व में माना जा रहा है कि यूरोप की ख़राब हालत के कारण दुनिया मंदी से उबर नहीं पा रही है.

एशिया प्रशांत साझेदारी में नौ देश शामिल हैं लेकिन चीन ने अभी तक इससे जुड़ी वार्ता में शामिल होने की इच्छा प्रकट नहीं की है.

एशिया प्रशांत में 21 देश हैं जो विश्व व्यापार का 40 प्रतिशत है.

दुनिया की आबादी का 40 प्रतिशत दुनिया के इसी हिस्से में आता है.

होनोलुलू में शनिवार को अपने भाषण में ओबामा का कहना था, '' हम एकसाथ मिलकर न केवल निर्यात बढ़ा सकते हैं बल्कि उपभोक्ताओं के लिए अधिक से अधिक वस्तुओं का निर्माण कर सकते हैं. नौकरियां पैदा कर सकते हैं और भविष्य में बाज़ारों में प्रतिद्वंद्विता कर सकते हैं. ''

ओबामा का कहना था कि यह एक ऐसा समझौता होगा जो भविष्य में सभी व्यापार समझौतों के लिए आदर्श बनेगा. हालांकि उन्होंने समझौते की रुपरेखा के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी.

ओबामा ने चीन और रुस के राष्ट्रपतियों के साथ अलग अलग बातचीत भी की है.

जिंताओ के साथ बैठक के दौरान ओबामा ने युआन के अवमूल्यन पर खासी चर्चा की है.

रुस के राष्ट्रपति मेदवेदेव के साथ बैठक में अफ़गानिस्तान, ईरान और सीरिया समेत कई अन्य मुद्दों पर बातचीत हुई है.

ओबामा का कहना था कि दोनों देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान पर क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए इस पर मिलकर काम किया जाएगा.

प्रशांत देशों के समझौते में चिली, न्यूज़ीलैंड, ब्रूनेई, सिंगापुर, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, विएतनाम और पेरु शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं.

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान ने भी इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है.

ओबामा का कहना था कि वो जापान के प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा के इस साहसिक क़दम की सराहना करते हैं. व्यापार वार्ताओं में शामिल होने के नोडा के फ़ैसले का जापान के किसानों ने विरोध किया था.

समझौते के बारे में ओबामा ने जापान के प्रधानमंत्री नोडा से अलग से भी बातचीत की है.

व्हाइट हाउस के अनुसार जापान मांस के आयात पर लगे प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करने पर राज़ी हुआ है और बाज़ार बड़ा कर रहा है ताकि अमरीका अपने यहां से मांस का निर्यात जापान में कर सके.

हू जिंताओ ने इन समझौता वार्ताओं में शिरकत नहीं की लेकिन उनका कहना था कि वो किसी ऐसी वार्ता का समर्थन करते हैं जिसका लक्ष्य लंबे समय में इस क्षेत्र में मुक्त व्यापार की व्यवस्था करे और भविष्य में एपेक संगठन के सदस्यों को शामिल करे.

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