'निजी कंपनियाँ संकट में हो तो मदद के तरीके ढूँढने होंगे'

इमेज कॉपीरइट AFP

आर्थिक संकट में फँसी किंगफ़िशर एयरलाइंस को सरकारी मदद दिए जाने को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है.

सार्क सम्मेलन से भारत लौटते समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विमान में पत्रकारों से बात की. किंगफ़िशर मसले पर उन्होंने कहा, “एयरलाइंस का प्रंबधन कुशलतापूर्वक चलाना चाहिए. लेकिन अगर निजी कंपनियाँ संकट में हों तो हमें उनकी मदद करने के तरीके ढूँढने होंगे.”

किंगफ़िशर एयरलाइंस इस समय आर्थिक दिक्कतों से जूझ रही है. बाज़ार में किंगफ़िशर के बंद होने की बात हो रही है. पिछले कुछ दिनों में एयरलाइंस को अपनी कई उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं.

सितंबर में किंगफ़िशर एयरलाइंस ने कम दाम वाली अपनी उड़ान सेवा किंगफ़िशर रेड को अगले चार महीनों में बंद करने का फ़ैसला किया था.

जबकि एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या ने ट्विटर पर लिखा है, "हर सरकार ने एयरलाइंस का समर्थन किया है. भारत में एयरलांइस पर बहुत ज़्यादा कर लगाया जाता है. ऐसा क्यों?"

इससे पहले उन्होंने ये भी ट्विट किया था कि जब सरकार इतना ज़्यादा कर लगा रही है तो क्या ऐसे में ये किंगफ़िशर का फ़र्ज़ है कि वो ऐसे रूट पर उड़ान भरता रहे जहाँ नुकसान ही नुकसान है? या फिर एयरलाइंस चलाए जाने की वित्तिय रूप से आसान बनाया जाए ?

एक आंकड़े के मुताबिक़ किंगफ़िशर को वर्ष 2010-11 में क़रीब 1000 करोड़ का घाटा हुआ और उस पर 7,000 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ है.

संबंधित समाचार