सेंसेक्स दो साल के निचले स्तर पर पहुँचा, फिर संभला

  • 23 नवंबर 2011
भारतीय मुद्रा रुपए के नोट और सिक्के
Image caption मंगलवार को डॉलर के मुकाबले में रुपए में रिकॉर्ड गिरावट आई थी

बुधवार को एशिया के कई शेयर बाज़ारों की तरह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी लुढ़का और संभलने से पहले दो साल के सबसे निचले स्तर पर पंहुच गया.

महत्वपूर्ण है कि बुधवार को अमरीका के तीसरी तिमाही के अनुमान में उसके आर्थिक विकास में गिरावट का ज़िक्र होने से एशिया बाज़ारों में गिरावट आई.

बुधवार के कारोबार में हॉंगकॉंग के शेयर बाज़ार में 2.12 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया के शेयर बाज़ार में 2.36 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के बाज़ार में दो प्रतिशत की गिरावट देखी गई.

उधर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 365.45 अंक गिरकर 15699.97 पर बंद हुआ.

दोपहर के कारोबार के समय तक सूचकांक 586.73 अंक गिरकर 15478.69 पर आ गया था. पिछले दो साल में यह सबसे निचला स्तर है.

सेंसेक्स बुधवार सुबह 1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ शुरु हुआ था और भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर 500 अंक गिरकर 15564.95 पर आ गया.

इस साल भारतीय शेयर बाज़ार करीब़ 25 प्रतिशत गिर गया है.

रुपया भी लुढ़का था

ग़ौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और अमरीका-यूरोज़ोन के वित्तीय संकट से प्रभावित होते हुए डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत में बुधवार को रिकॉर्ड गिरावट आई थी.

रुपए की क़ीमत में रिकॉर्ड गिरावट, सरकार की मुश्किलों बढ़ीं

एक डॉलर के मुकाबले में रुपए की क़ीमत इस साल एक जनवरी में 44.67 रुपए से घटकर 22 नवबंर की सुबह तक 52.73 रुपए हो गई, जो 18 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट थी. इसके बाद रुपया कुछ संभला था.

पर्यवेक्षकों के अनुसार भारतीय रुपए में आई रिकॉर्ड गिरावट से महँगाई पर काबू पाने की सरकार की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है.

रुपए के अवमूल्यन पर प्रोफ़ेसर भरत झुनझुनवाला को सुनिए

हालाँकि इस मसले पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि ये अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के कारण हुआ है और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया में सीमित हद तक ही दख़ल दे सकता है.

'सुधारों का अभाव, ब्याज दर में वृद्धि से दुर्दशा'

भारतीय शेयर बाज़ार में बैंक, रिफ़ाइनरी और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सबसे ज्य़ादा गिरावट आई है.

दलालों के मुताबिक मंगलवार को शेयर बाज़ार के संभलने के बाद अब खुदरा निवेशको और फंडो में भारी बिकवाली देखी गई है. अमरीका की विकास दर में गिरावट के आसार से भी अनिश्चितता का मौहाल बढ़ा है.

बुधवार को भारत के राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज निफ़्टी में भी दोपहर के कारोबार तक 140.65 अंको की गिरावट देखी गई.

माना जा रहा है कि बढ़ती महंगाई दर, धीमी विकास और राजनैतिक गतिरोध का भी शेयर बाज़ार पर असर पड़ रहा है.

इंन्वेस्टमेंट एडवाइज़री फ़र्म, यानी निवेशकों को सलाह देने वाली कंपनी के एक विशेषज्ञ हेमेन कपाडिया ने एएफ़पी को बताया, "आर्थिक सुधार का दूसरा दौर शुरु नहीं हुआ है. ब्याज़ की दर बढ़ रही है और विकास दर गिर रही है जिससे अर्थव्यवस्था पर उल्टा असर पड़ रहा है. इसीलिए शेयर बाज़ार की दुर्दशा हो रही है."

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने एक साल में 13 बार ब्याज़ की दर बढ़ाई है और भारत की औधोगिक विकास दर भी धीमी पड़ी है.

कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि यूरोप के बाज़ार में मंदी की वज़ह से भी विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालने लगे हैं.

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