भारतीय कंपनियों को अफ़ग़ानिस्तान में खनन का ठेका

अफ़ग़ानिस्तान में खदान इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में खनिजों के बड़े भंडार हैं जिनका मूल्य ख़रबों डॉलर है

अफ़ग़ान खनन मंत्रालय का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में बड़े लौह अयस्क भंडार में खनन का ठेका भारतीय कंपनियों के एक समूह या कंसॉर्शियम को मिला है.

ये ठेका 10.3 अरब डॉलर (क़रीब 535 अरब रुपए) का है और ये कंपनियाँ कुल मिलाकर मध्य अफ़ग़ानिस्तान के तीन भंडारों में खनन का कार्य करेंगीं.

सात कंपनियों के इस कंसॉर्शियम में सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया भी शामिल है.

एक चौथे लौह अयस्क भंडार में खनन का काम कनाडा की किलो गोल्डमाइन्स नाम की कंपनी को दिया गया है.

इन सभी ठेकों के लिए अनुबंधों पर हस्ताक्षर अगले साल के शुरु में किए जाएंगे.

पिछले महीने ही अफ़ग़ानिस्तान ने भारत के साथ एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

इस समझौते के बाद दोनों पक्षों ने कहा था कि इसका उद्देश्य व्यापार, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ाना है, लेकिन इसने दोनों ही देशों के पड़ोसी पाकिस्तान को चिंतित कर दिया था.

सबसे बड़ी परियोजना

बामियान के हाजीगाक में मौजूद लौह खदान में क़रीब दो अरब टन के अयस्क का खनन वर्ष 2015 में शुरु होने की उम्मीद है.

इस खदान में लौह की मौजूदगी 64 प्रतिशत है.

अधिकारियों का कहना है कि ये परियोजना अफ़ग़ानिस्तान की सबसे बड़ी विदेशी पूंजी निवेश वाली परियोजना है.

खनन मंत्रालय का कहना है कि यदि अफ़ग़ानिस्तान के खनिज भंडारों का ठीक ढंग से दोहन किया गया तो एक दशक में अफ़ग़ानिस्तान आत्मनिर्भर हो सकता है क्योंकि वहाँ कुल तीन ख़बर डॉलर के खनिज भंडार होने का अनुमान है.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि बड़ा सवाल ये है कि क्या निवेशक अफ़ग़ानिस्तान में खदानों को विकसित करने और रेल के निर्माण में लगने वाली बड़ी धन राशि निवेश करना चाहेंगे, जिसका अभी कोई अस्तित्व नहीं है.

ख़ासकर उन परिस्थितियों में जब वर्ष 2014 तक ज़्यादातर नेटो की फ़ौजें अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जा चुकी होंगीं.

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