केंद्रीय बैंकों की अहम घोषणा के बाद शेयर बाज़ार उछले

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड
Image caption इस घोषणा में बैंक ऑफ़ इंग्लैंड भी शामिल है.

दुनिया के कुछ सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक योजना की घोषणा की है.

अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व, यूरोपीय सैंट्रल बैंक, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड, कनाडा, जापान और स्विटज़रलैंड के केंद्रीय बैंक इस योजना में भागीदार हैं.

इन केंद्रीय बैंकों ने कहा है कि वो अमरीकी डॉलर की ख़रीद को सस्ता करेंगे. उन्हें उम्मीद है कि इस क़दम से आम लोगों और व्यवसायों को धन आसानी से उपलब्ध हो पाएगा.

इस ख़बर के बाद दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में उछाल देखा जा रहा है.

शेयर बाज़ारों में उछाल

सस्ते अमरीकी डॉलर के अलावा ये बैंक ज़रुरत पड़ने पर पांच दिसंबर से दुनिया की अन्य कई प्रमुख मुद्राओं को भी आसानी से आम बैंकों को मुहैया करवाएंगे.

इस घोषणा के बाद जर्मनी का डाक शेयर बाज़ार पांच प्रतिशत, फ़्रांस का काक शेयर बाज़ार 4.2 प्रतिशत और ब्रिटेन का फ़ूटसी 100 शेयर बाज़ार तीन प्रतिशत ऊपर गया है.

शेयर बाज़ार में आए इस उछाल का विशेष लाभ बैंकों के शेयरों को हुआ है. ब्रिटेन में बार्कलीज़ के शेयरों में छह प्रतिशत बढ़ोतरी देखी गई है जबकि लॉयड्स और रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड सात प्रतिशत ऊपर गए हैं.

उधर फ़्रांस में बीएनपी पारिबा और सोसाइते जेनेराल और जर्मन में डॉएच्चे बैंक के शेयरों में भी काफ़ी उछाल आया है.

'फ़ैसले का स्वागत और समर्थन'

इस ख़बर के बाद यूरो भी डॉलर के मुक़ाबले मज़बूत हुआ है.

अमरीका के वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर ने केंद्रीय बैंकों के इस क़दम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे यूरोपीय वित्तीय व्यवस्था पर दवाब घटेगा.

टिमोथी गीथनर ने कहा, “हम दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों ने जो क़दम उठाए हैं उनका समर्थन करते हैं. इन क़दमों ये यूरोपीय वित्तीय व्यवस्था पर दवाब कम होगा और वैश्विक आर्थिक रिकवरी को गति मिलेगी. ”

ग़ौरतलब है कि यूरोप में गहराते ऋण संकट के बीच बैंकों को धन की उपलब्धता की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

बैंकों को भय है कि जिन कुछ देशों को उन्होंने कर्ज़ा दिया है वो शायद उसे वापस लौटाने की स्थिति में नहीं होंगे.

इसका एक अर्थ ये भी है कि बैंक अब एक दूसरे को भी उधार देने से कतरा रहे हैं. इसकी वजह से उन्हें धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

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