राजनीतिक असहमति से चिंतित टाटा

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Image caption रतन टाटा को पिछले वर्षों में राजनीतिक असहमतियों से नुक़सान भी उठाना पड़ा है

भारत के विकास दर में कमी आने पर भले ही योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया चिंतित न हों और अभी भी आशावादी हों कि इसमें सुधार भी आएगा.

लेकिन भारत के बड़े उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा चिंतित दिखते हैं और उन्होंने संकेत दिए हैं कि राजनीतिक असहमति विकास की राह में रोड़ा बन रहा है.

हालांकि वे ऐसी चिंता व्यक्त करने वाले पहले उद्योगपति नहीं हैं क्योंकि इससे पहले मुकेश अंबानी से लेकर अजीम प्रेम जी तक कई उद्योगपति इस पर सार्वजनिक रुप से चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं.

कुछ उद्योगपतियों ने यहाँ तक कहा कि ये सरकार निर्णय नहीं ले पा रही है और सारी प्रक्रिया रुकी हुई है.

'रोड़ा न बनने दें'

30 सितंबर को ख़त्म हुई दूसरी तिमाही में भारत के विकास की दर घटकर 6.9 फीसदी हो जाने और उत्पादन क्षेत्र की विकास दर 2.7 फीसदी गिर जाने पर टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

टाटा ने अपने संदेश में पिछले दिनों लिखा, "राजनीतिक असहमति और निहित स्वार्थ को कभी भी भारत के आर्थिक विकास के रास्ते में रोड़ा नहीं बनने देना चाहिए."

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में आई तेज़ी और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही अहमियत को हमें कम नहीं होने देना चाहिए.

पिछले हफ्ते यूपीए सरकार ने मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार में 51 फीसदी विदेशी पूंजी निवेश को सहमति दी थी. इस फैसले की देशी और विदेशी निवेशकों ने सराहना की थी.

नीति के ऐलान के बाद बीबीसी से बातचीत में फाइनेन्शियल एक्सप्रेस अख़बार के कार्यकारी संपादक एमके वेणु ने भी कहा था कि सरकार इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय जगत में नीतिगत मामलों में बनी अपनी लचर छवि को सुधारने की कोशिश कर रही है.

लेकिन मंत्रिमंडल के इस फ़ैसले का बहुत सी राजनीतिक पार्टियों ने विरोध किया. इनमें से कुछ तो सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हैं.

पहले महंगाई, काला धन और फिर विनिवेश की वजह से पिछले नौ दिनों से भारत की संसद में कार्यवाही नहीं चल पाई है.

आलोचना

किंगफिशर एयरलाइन्स के मालिक विजय माल्या ने भी बुधवार को ट्विटर पर लिखा, "राजनीति के तरीके भी अद्भुत हैं, कई सांसद खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश को सही मानते हैं लेकिन पार्टी के तय रुख को मानने के लिए मजबूर हैं."

इससे पहले भी भारत के व्यापार जगत के दिग्गजों ने फ़ैसले लेने पर सरकार के रूख़ की आलोचना की है और उसे आगाह किया है.

पिछले महीने विप्रो कंपनी के अध्यक्ष अज़ीम प्रेमजी ने बैंगलोर में एक कार्यक्रम में कहा था, "सरकार में राजनेताओं में फ़ैसले लेने की क्षमता का अभाव है."

इससे पहले अक्तूबर में महिन्द्रा समूह के वाइस-चेयरमैन आनंद महिन्द्रा ने ट्विटर पर लिखा था कि सकल घरेलू उत्पात के दूसरी तिमाही के नतीजे जागने के लिए अलार्म है और बता रहा है कि कड़े नीतिगत फैसलों की ज़रूरत है.

इसी तरह की बात मुकेश अंबानी भी कर चुके हैं.

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