भारतीय कार उद्योग ढलान पर

  • 8 दिसंबर 2011
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Image caption गाड़ियों के निर्माण के लिए ज़रूरी वस्तुएं जैसे स्टील, एल्युमीनीयम, प्लास्टिक और रबर की कीमतों में इज़ाफा हुआ है

सालों से फलता-फूलता भारत का कार बाज़ार इस साल बमुश्किल अपने लगाए पैसे बिना नफ़े-नुकसान के बराबर कर पाएगा. कार उद्योग की एक संस्था ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि वो इस साल बिकने वाली कारों के अपने पूर्वानुमान में कटौती करेगी.

इस संस्था का कहना है कि भारत में कार उद्योग घटती मांग, बढ़ती लागत और ऊपर जाती ब्याज दरों से परेशान है.

रॉयटर न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक सोसायटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के निदेशक सुगतो सेन ने कहा है," हम जनवरी में अपने पूर्वानुमानों को कम करने वाले हैं."

पिछले साल नवंबर के महीने में गाड़ियों की बिक्री सात फ़ीसदी बढ़ी थी. लेकिन अप्रैल से शुरू हुए इस वित्तीय साल में पिछले वर्ष के मुकाबले महज़ 3.5 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी ही दर्ज की गई.

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Image caption मारुती की हड़ताल के असर ने भी इस गिरते हुए बाज़ार को और धक्का पहुंचाया है

एक तरफ़ तो गाड़ियों के निर्माण के लिए ज़रूरी वस्तुएं जैसे स्टील, एल्युमीनीयम, प्लास्टिक और रबर की कीमतों में इज़ाफा हुआ है दूसरी तरफ़ वाहन ऋण के ब्याज की कीमतों में तेज़ी आने की वजह से मांग में कमी हुई है.

वाहन उद्योग के विश्लेषक यारेश कोठारी कहते हैं कि इस तरह के परिणामों की कार उद्योग को उम्मीद नहीं थी.

कोठारी यह भी कहते हैं, " मारुती की हड़ताल के असर ने भी इस गिरते हुए बाज़ार को और धक्का पहुंचाया है."

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुती सुज़ूकी ने गत सप्ताह कहा था कि नवंबर के महीने में इसकी बिक्री क़रीब 18.5 प्रतिशत कम हुई है.

मारुती की हड़ताल की वजह से ही भारत की दूसरी कार निर्माता कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री नवंबर में बढ़ी थी. टाटा की बिक्री में 41 फ़ीसदी का इज़ाफा हुआ था तो महिन्द्रा की बिक्री में 53 फ़ीसदी का उछाल देखा गया था.

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