ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं

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Image caption ब्याज दर नहीं बढ़ने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है.

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी मध्यावधि मौद्रिक नीतियों में ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है.

ये घोषणा मुंबई में शुक्रवार को की गई.

रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को 8.5 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 7.5 प्रतिशत पर ही रहने दिया.

रेपो रेट उस ब्याज दर को कहते हैं जिस पर केंद्रीय बैंक दूसरे बैंको को क़र्ज़ देता है. रिवर्स रेपो रेट इसके उलट है यानि जिस दर पर वो बैंको से ऋण लेता है.

कैश रिज़र्व रेशियो यानि सीआरआर भी पहले की तरह छह फ़ीसदी पर बना रहेगा.

बहस

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आरबीआई के फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि केंद्रीय बैंक के फ़ैसलों का असर ब्याज दरों पर पड़ सकता है.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "गवर्नर ने विकास को लेकर अपनी चिंता को दर्शाया है. विकास की गति पिछले कुछ महीनों में काफ़ी कम हुई है. अक्तूबर में औद्योगिक विकास की गति में धीमापन देखने को मिला. खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में कमी आई जिसका असर नवंबर के थोक व्यापार सूचकांक में देखने को मिला है."

उनका कहना था, "ज़रूरी है कि इस वित्तीय वर्ष के दौरान हम उद्योग जगत की भावनाओं का ध्यान रखते हुए विकास की गति को तेज़ करने की ओर ध्यान दें."

वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले हफ़्तों में मंहगाई दर में और कमी आएगी इसलिए आज की घोषणा स्वागत योग्य है.

ब्याज दरों को लेकर पिछले काफ़ी दिनों से बहस जारी थी. जहाँ लगातार बढ़ती दर का असर मध्यम वर्ग के बजट पर पड़ रहा था, जिसका कारण था घरों और कार के लिए लिए गए क़र्ज़ों के मासिक ब्याज का ऊपर जाना, वहीं दूसरी तरफ़ ये भी कहा जा रहा था कि ये मंहगाई से दबे हुए लोगों पर और बोझ डाल रही है.

फिर इस बैंको के ऋण दर में बढ़ोत्तरी से उद्योग जगत को मिलने वाले क़र्ज़ भी मंहगे हो गए थे जिसका असर निर्माण क्षेत्र में विकास की धीमी होती गति में सामने आ रहा था.

रिज़र्व बैंक ने पिछले साल मार्च से ब्याज दर को तेरह दफ़ा बढ़ाया था.

रिज़र्व बैंक का कहना था कि बढ़ती मंहगाई दर को कम करने के लिए ब्याज दर का बढ़ाया जाना ज़रूरी था.

थोक व्यापार पर आधारित ताज़ा आंकड़ो के मुताबिक़ मंहगाई की दर पिछले माह के मुक़ाबले (9.73%) नवंबर माह में 9.11 प्रतिशत थी.

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