छह यूरो मुद्रा देशों की रेटिंग कम करने पर विचार

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Image caption फ्रांस पर ताज़ा अवेक्षण वरिष्ठ फ्रांसिसी अधिकारियों के ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की आलोचना करने के एक सप्ताह के बाद आया है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फ़िच ने चेतावनी दी है कि तकनीकी और राजनीतिक कारणों से यूरोप में उभरे क़र्ज़ संकट का व्यापक समाधान किया जाना मुमकिन नहीं है.

फ़िच ने एक बयान में कहा है कि वो यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले छह देशों - बेल्जियम, स्पेन, सलोवेनिया, इटली, आयरलेंड और साईप्रस की रेटिंग को कम करने के बारे में विचार कर रहा है.

क़र्ज़ चुका पाने की क्षमता का आकलन करने वाली एजेंसी ने फ्रांस की दीर्घकालिक रेटिंग को भी नकारात्मक सूची में डाल दिया है.

एजेंसी ने पहले फ्रांस के 'स्थिर' आंका था. अब उसे नकारात्मक सूची में डाल दिया गया है. हालांकि फिच ने फ्रांस की रेटिंग को 'एएए' पर ही क़ायम रखा है.

इसका मतलब है कि अगले 12 से 18 महीनों में उसकी रेटिंग कम की जा सकती है.

फिच ने कहा कि इस बदलाव का कारण है यूरोज़ोन के ऋण संकट से सरकार पर देनदारी के बढ़ने के आसार.

ब्रिटेन की आलोचना

एजेंसी ने एक बयान में कहा, ''नौ और 10 दिसंबर को हुए यूरोपीय संघ के सम्मेलन के बाद फ़िच ने पाया कि यूरोज़ोन के संकट का पूरा समाधान तकनीकी और राजनीतिक कारणों से संभव नहीं है.''

जिन छह देशों की रेटिंग को कम किया गया है उनकी रेटिंग तीन महीनों में ही कम हो सकती है.

फ्रांस पर ताज़ा आंकलन वरिष्ठ फ्रांसिसी अधिकारियों के ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की आलोचना करने के एक सप्ताह के बाद आया है. वित्त मंत्री फ्रांसोइस बारोइन ने उसे 'बहुत चिंताजनक' कहा था.

फांस के केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिटेन की क्रेडिट रेटिंग को फ्रांस से पहले कम किया जाना चाहिए.

लेकिन फिच ने कहा कि संकट बढ़ने की स्थिति में यूरोज़ोन की 'एएए' रेटिंग वाले बाक़ी देशों की तुलना में वह फ्रांस पर ज़्यादा खतरा देखता है क्योंकि फ्रांस पर क़र्ज़ का बोझ अधिक है.

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