मुद्रा स्फीति की दर छह साल के निचले स्तर पर

  • 29 दिसंबर 2011
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Image caption भारत में खानेपीने की चीज़े सस्ती हुई हैं

भारत में खाद्य मुद्रा स्फीति की दर 17 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में घटकर 0.42 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है. देश में खाद्य मुद्रा स्फीति का यह लगभग छह वर्ष का सबसे निचला स्तर है.

ज़रूरी खाद्य वस्तुओं जैसे सब्ज़ियों, प्याज, आलू और गेहूं की क़ीमतों में कमी से खाद्य मुद्रा स्फीति की दर नीचे आई है.

थोक मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य मुद्रा स्फीति इससे पिछले हफ़्ते 1.81 प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2010 में इसी अवधि में यह दर 15.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी.

आईसीआरए से जुड़ी एक अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि इस गिरावट का असर सम्पूर्ण मुद्रा स्फ़ीति पर भी पड़ेगा और इसकी दर दिसम्बर में आठ प्रतिशत से नीचे जा सकती है.

उनका मानना है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के रुख़ पर भी इसका असर पड़ेगा.

भारत की मुद्रा स्फीति की दर इस साल नवंबर में 9.11 प्रतिशत दर्ज की गई थी.

भारत में वर्ष 2011 में खाने-पीने की रोज़मर्रा की ज़रूरी चीजों के दाम ऊँचे रहे जिसकी वजह से मुद्रा स्फीति की दर पूरे साल नौ प्रतिशत से ऊपर रही.

इसकी वजह से रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने मार्च 2010 के बाद से ब्याज की दरों में 13 बार बढ़ोत्तरी की.

लेकिन अब उम्मीद की जा रही है कि मार्च तक मुद्रा स्फीति की दर गिरकर सात प्रतिशत तक आ सकती है.

विश्लेषक यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया वर्ष 2012 के मध्य तक अपनी ब्याज दरों में 25 अंकों की कटौती कर सकता है.

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