आरबीआई ने सीआरआर में कमी की

  • 24 जनवरी 2012
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Image caption महंगाई से लड़ने के बजाय अब रिज़र्व बैंक की नीतियों का फ़ोकस आर्थिक विकास पर होगा

भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की है.

इस घोषणा के बाद नकद आरक्षित अनुपात 5.5 प्रतिशत हो जाएगा. सीआरआर में कटौती के बाद बैंकों के पास 32,000 करोड़ रुपए नक़द की उपलब्धता बढ़ेगी.

सीआरआर उस हिस्से को कहते हैं जो बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जमा करना होता है.

रिज़र्व बैंक का कहना है कि ऐसा करने से बैंकिंग प्रणाली में नक़दी की उपलब्धता बढ़ेगी यानी बैंकों से पास ज़्यादा पैसा होगा.

महंगाई से लड़ने के बजाय अब रिज़र्व बैंक की नीतियों का फ़ोकस आर्थिक बढ़ोत्तरी पर होगा.

रिज़र्व बैंक के अनुमान के मुताबिक़ 2011-12 में आर्थिक विकास की दर 7.6 प्रतिशत के बजाय 7 प्रतिशत होगी.

महंगाई

इससे पहले रिज़र्व बैंक का अनुमान था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 2011-12 में 7.6 प्रतिशत होगी.

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की थी.

जहां तक महंगाई की बात है, तो बैंक ने मार्च के अंत में महंगाई की दर सात प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है.

महंगाई से निपटने के नाम पर रिज़र्व बैंक ने मार्च 2010 से लेकर हाल तक 13 बार ब्याज दर बढ़ाए थे.

लेकिन इसके बार वित्त मंत्रालय को लगा था कि अर्थव्यवस्था के विकास दर में आई कमी की एक वजह ब्याज दर का बढ़ना भी है.

बैंक का कहना है कि निवेश और भारत में पैसे के आगमन की गति भी धीमी पड़ गई है.

रिज़र्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने अपने वक्तव्य में कहा, “विकास और महंगाई के बीच के संतुलन में अब हमारी आर्थिक नीति का ध्यान विकास पर ज़्यादा होगा. लेकिन हमें साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि महंगाई का दबाव भी नियंत्रण में रहे.”

पहले ही उम्मीद की जा रही थी कि आरबीआई सीआरआर में कटौती करेगा. अब ये अनुपात 6 प्रतिशत से घट कर 5.50 प्रतिशत हो गया है.

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