ब्रिटेन-चेक ईयू के आर्थिक समझौते के ख़िलाफ़

  • 31 जनवरी 2012
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Image caption कई यूरोपीय देशों पर अभी भी संकट मंडरा रहा है

ब्रशल्स में यूरोपीय संघ की एक बैठक में भविष्य में किसी भी कर्ज़ संकट से बचने के लिए प्रस्तावित एक वित्तीय समझौते पर 27 में से 25 देशों ने सहमति दे दी है.

चेक गणराज्य ने ब्रिटेन के साथ जाते हुए इस समझौते का विरोध किया है.

इस समझौते के अनुसार देशों पर बजट को लेकर सख्य क़ानून लागू किए जाएँगे.

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हरमन वान राम्पुए ने कहा है कि यूरो को स्थिर करने के लिए यूरोपीय नेताओं ने एक कठिन और पीड़ादायक निर्णय लिया है.

हालांकि उन्होंने कहा है कि विकास की दर को बढ़ाने और बेरोज़गारी घटाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना है.

उल्लेखनीय है कि यूरोपीय देशों में बेरोज़गारी 10 प्रतिशत से अधिक है, कई देशों में युवाओं में इसका प्रतिशत बहुत अधिक भी है.

विरोध

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि अगर ये समझौता यदि ब्रितानी हित के ख़िलाफ़ होगा तो उनका देश आवश्यक क़दम उठाएगा.

उन्होंने कहा, "हम इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं और ब्रिटेन के लिए ऐसा करने के लिए कोई बाध्यता भी नहीं है."

उनका कहना है कि यूरोपीय संघ की संस्थाओं की ओर से वित्तीय समझौते को लेकर उनकी कुछ 'क़ानूनी चिंताएँ' हैं.

जबकि फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी का कहना है कि चेक गणराज्य ने 'संवैधानिक कारणों से' समझौते में शामिल न होने का निर्णय लिया है.

विश्लेषकों का कहना है कि चेक राष्ट्रपति वैसे भी यूरो को लेकर शंकालु रहे हैं और हो सकता है कि वे समझौते पर कभी हस्ताक्षर न करें.

यूरोज़ोन की सबसे ताक़तवर अर्थव्यवस्था और सबसे बड़ा कर्ज़दाता देश जर्मनी चाहता था कि एक ऐसा समझौता हो सके जिससे कि हर सदस्य देश पर कुछ बजटीय प्रावधानों का दबाव रहे.

इस समझौते के तहत यूरोपीय अदालतों को ये अधिकार होगा कि वह समझौते के पालन पर नज़र रखे और नियम तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ जुर्माना लगाए.

संकट का दबाव

यूरोज़ोन के संकट का असर सोमवार के यूरोपीय सम्मेलन पर भी दिखाई पड़ा.

बेल्जियम में आम हड़ताल की वजह से यातायात ठप पड़ा हुआ था और इसने यूरोपीय नेताओं को याद दिलाया कि सरकारों की ओर से कटौती के जो क़दम उठाए जा रहे हैं, जनता उसके ख़िलाफ़ है.

संभावित बजट कटौतियों को लेकर एक डर ये भी है कि इससे उद्यमिता और प्रशिक्षण के कार्यक्रमों को नुक़सान होगा.

यूरोपीय देशों ने हालांकि एक साझा बयान में कहा है कि बजट घाटे को कम करना अपने आपमें पर्याप्त नहीं होगा.

उन्होंने माना है कि उन्हें अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत बनाना होगा और विकास को टिकाउ बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना होगा.

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