'निर्दोष को सज़ा...'

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने 2 जी स्पेक्ट्रम में 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है

अदालत के तमाम विवादित टू जी लाइसेंसों को रद्द करने के फ़ैसले पर उद्योग जगत ने भी कई किस्म की टिप्पणियाँ की हैं. ज़्यादातर बयान संयमित हैं और सतर्क ढंग इस फैसले के प्रभावों की राह देखते लगते हैं.

मोबाइल के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी यूनीनॉर जिसका लाइसेंस भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते प्रभावित होगा उसने इस फैसले के बाद एक बयान में कहा कि घोटाले में उनकी कोई गलती नहीं है.

'निर्दोष को सज़ा'

यूनीनॉर ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा "हमारे साथ अन्याय हुआ है और हमने केवल सरकार की नीतियों का पालन किया है. हम चकित हैं कि यूनीनॉर को उन गलतियों की सज़ा मिल रही है जिन गलतियों के लिए अदालत ने सरकार को दोषी ठहराया है."

कंपनी ने अपने इस बयान में यह भी साफ़ किया है कि इस आदेश की वजह से तत्काल प्रभाव से उसके काम बंद नहीं होंगे. कंपनी ने यह भी आशा जताई है कि आगे अदालत के फैसले को लागू करते वक़्त इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि उसके तीन करोड़ 60 लाख उपभोक्ता, 17500 कर्मचारी और 22000 सहयोगी बिना गलती के प्रभावित ना हों.

'अच्छा फैसला'

दूसरी तरफ उद्योग जगत की संस्था एसोचैम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से गंभीर और दीर्घकालिक निवेशकों को लाभ होगा. एसोचैम ने यह भी आशा जताई है कि अब जो नई टेलीकॉम नीति बनेगी वो पारदर्शी होगी और इस तरह की होगी कि व्यवस्थित ढंग से लंबे समय तक चले.

उद्योग जगत की एक दूसरी संस्था फ़िक्की ने कहा है कि इस फैसले से एक नए वातावरण का सूत्रपात होगा और देश में अनिश्चय का दौर समाप्त होगा. फ़िक्की ने सरकार से अनुरोध किया है कि सरकार जल्द से जल्द कदम उठाए ताकि उपभोक्ता से लेकर निवेशक तक सभी भागीदारों को संतुष्टी मिल सके.

उद्योग जगत पर नज़र रखने वाली और कारोबारी सलाह देने वाली संस्था पीडब्ल्यूसी इंडिया के कार्यकारी निदेशक मोहम्मद चौधरी का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से टेलिकॉम उद्योग एक व्यापक नीति और पारदर्शी नियम चाहता था.

चौधरी के अनुसार इस फ़ैसले के मद्देनज़र अब यह देखा जाना चाहिए कि किस तरह से टेलीकॉम कंपनियों, उपभोक्ताओं, निवेशकों और इन कंपनियों को क़र्ज़ देने वालों के अधिकार सुरक्षित रहें.

कुल मिला कर इन वक्तव्यों से यह समझ में आता है कि आने वाले दिनों में प्रभावित कम्पनियां किस दिशा में अपनी लड़ाई ले जा सकती हैं.

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