जीडीपी में गिरावट: निजी आय और रोज़गार पर पड़ेगा असर

  • 29 फरवरी 2012
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Image caption खनन क्षेत्र में नकारात्मक और मैनुफ़ैक्चरिंग में ना के बराबर बढ़ोतरी हुई है.

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी पड़ने के संकेत अब साफ होते जा रहे हैं.

बुधवार को जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की विकास दर घटकर 6.1% रह गई है. ये पिछले करीब तीन साल में सबसे ज्यादा गिरावट है.

आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस धीमी होती गति का असर लोगों की आय पर पड़ सकता है. साथ ही रोज़गार के अवसर भी कम हो सकते हैं.

निजी आय में कमी एक आर्थिक दुष्चक्र की शुरूआत होती है जिसका असर पूरी अर्थव्यस्था पर पड़ता है.

'आर्थिक दुष्चक्र'

आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार एमके वेणू ने बीबीसी को बताया, “आय में कमी के कारण ज़ाहिर है कि आम आदमी की ख़रीदने की क्षमता कम होगी और इससे एक दुष्चक्र सा बन जाता है. जिसके चलते खपत में कमी आ जाती है.”

उन्होंने कहा कि पहले निजी निवेश में कमी को ही विकास दर घटने की वजह माना जा रहा था लेकिन अब खपत में आई गिरावट भी इसका कारण माना जा रहा है.

कृषि क्षेत्र हांलाकि कुल मिलाकर 2.7 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है लेकिन दालों, तेल और मोटे अनाज की पैदावर में कमी आई है.

दालों में पैदावार में आई 10.3% की कमी चिंता का विषय है क्योंकि शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है. जानकार मानते हैं दालों के दाम और बढ़ सकते हैं.

चिंता की बात

एमके वेणू कहते हैं, “दलहन की पैदावार पिछले छह-सात साल से बढ़ी नहीं है. लेकिन चावल और गेंहूं में रिकॉर्ड पैदावार हुई है.”

उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से ठीक-ठाक खपत बरकरार थी जिसकी वजह से साल 2010 तक जीडीपी की विकास दर साढ़े आठ फ़ीसदी हो गई थी.

लेकिन उन्होंने चिंता जताई की विकास दर की दिशा अगर ऐसी ही रही तो ये पूरे वित्त वर्ष के लिए 6.9% के सरकारी अनुमान से भी नीचे रह जाएगी.

लेकिन ऐसा नहीं है कि बाज़ार को इस गिरावट का अंदाज़ा ना हो.

धीमी पड़ती रफ़्तार
*वित्त वर्ष 2011-12 की तीसरी तिमाही
क्षेत्र % में
खनन -3.1
मैनुफ़ैक्चरिंग 0.4
कृषि 2.7
सेवा (वित्त, इंश्योरेंस आदि) 9.0
बिजली, गैस और जल आपूर्ति 9.0

कोटक महिंद्रा बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रानील पान ने एक बयान में कहा, “उम्मीद के मुताबिक खनन में नकारात्मक विकास दर और मैनुफैक्चरिंग में बहुत कम बढ़ोतरी है. लेकिन सेवा क्षेत्र की रफ़्तार भी कम हो रही है. रिज़र्ब बैंक इन आंकड़ों के बाद अप्रैल में ब्याज़ दरों में कटौती कर सकता है लेकिन मंहगाई दर पर बकरार चिंताओं के कारण ये कितना संभव होगा, कहना मुश्किल है. ”

तीसरी तिमाही के आंकड़ों पर अगर नज़र दौड़ाएं तो पता चलता है कि खनन क्षेत्र में 3.1% का नकारात्मक विकास हुआ है. यानि तुलनात्मक वर्ष से तीन प्रतिशत कम.

मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र में भी विकास दर ना के बराबर है.

लेकिन जीडीपी की विकास दर को नीचे खींचने में निजी निवेश में भारी कमी और खनन में नकारात्मक बढ़ोतरी भारी चिंता का विषय हैं.

खनन क्षेत्र की अर्थव्यस्था का ईंधन बताया जाता है. एमके वेणू कहते हैं कि अगर खनन में नकारात्मक बढ़ोतरी होगी तो कभी भी आठ प्रतिशत विकास दर नहीं मिल सकती है. वे इसके लिए वो पिछले एक-डेढ़ साल की सरकारी नीतियों को ज़िम्मेदार मानते हैं.

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