2जी: फैसला न्यायिक दायरे के बाहर: सरकार

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सरकार ने कहा कि टू-जी लाइसेंसों को रद्द करने के आदेश की समीक्षा जरूरी है, क्योंकि इसमें कई ख़ामियां हैं.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाईसेंसों का आबंटन रद्द करने के फैसले के ख़िलाफ़ समीक्षा याचिका दायर की है.

अदालत में दायर समीक्षा याचिका में सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम के आबंटन में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति अपनाने को असंवैधानिक बताने पर भी सवाल उठाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दो फरवरी को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में अहम फ़ैसला सुनाते हुए 11 कंपनियों के सभी 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है.

अदालत ने सुझाव दिया था कि अवैधता से बचने के लिए सरकार राष्ट्रीय संसाधनों की नीलामी का रास्ता अपनाए.

इसी आपत्ति जताते हुए सरकार ने याचिका में कहा है कि न्यायालय ने ऐसे क्षेत्र में प्रवेश किया है जो कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और जो न्यायिक समीक्षा की सीमा से बाहर है.

समीक्षा याचिका में कहा गया है कि स्पेक्ट्रम सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों का आबंटन केवल नीलामी के ज़रिए करने का न्यायालय का आदेश संविधान के ‘अधिकारों के बंटवारे’ के सिद्धांत से उलट है.

सरकार ने कहा कि टू-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को रद्द करने का दो फरवरी के आदेश की समीक्षा जरूरी है, क्योंकि इसमें कई ख़ामियां हैं.

संबंधित समाचार