प्रिय वित्तमंत्री जी,

  • 14 मार्च 2012

प्रिय वित्त मंत्री जी,

मैं जानता हूँ की इस बार परिस्थितियां सरकार और पार्टी के अनुकूल नहीं हैं, परन्तु मेरा आपसे अनुरोध यही है कि आप बजट आम जनता और राष्ट्र के विकास को ही ध्यान में रखकर पेश करें ताकि हम समग्र रूप से विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें.

सबसे पहले टैक्स व्यवस्था की अनियमितताओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ. इसमें सुधार की काफ़ी गुंजाईश लगती है.

सुनिए: प्रिय वित्तमंत्री जी

मौजूदा व्यवस्था में बड़े-बड़े धनाढ्य ग़लत तरीके से अर्जित आय को सफलतापूर्वक छुपाने में कामयाब हो जाते हैं और देश को टैक्स का घाटा होता है. कुछ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें कोई भी अपने व्यक्तिगत या ग़लत तरीके से कमाई गई संपत्ति को छुपाने में कामयाब ना हो.

दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूँ कि आज हमारी शिक्षा व्यवस्था में और अधिक निवेश की आवश्यकता है. सरकारी स्कूलों की काफ़ी दुर्दशा है और प्राइवेट शिक्षा केंद्र ज्यादा क़ामयाब हो रहे हैं, सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा के कारण आज गाँव में पढ़नेवाले गरीब विद्यार्थी पिछड़ते जा रहे हैं. अन्य प्रोत्साहन के साथ साथ इन विद्यालयों के पुनरुत्थान की भी आवश्यक है जिससे शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लग सके.

आज भारत एक बड़ा बाजार बन चुका है और सभी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भारत में व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं ऐसे में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कम प्राथिमकता देकर देश के छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे गरीब वर्ग मात्र इन कंपनियों में नौकरी ढूँढने की बजाए अपने पैरों पर खड़ा हो सकें. इससे वैश्विक आर्थिक मंदी का भी भारत पर असर कम होगा.

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक निवेश करके बढ़ावा दिया जाना चाहिए, यह हमारे भविष्य के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है.

धन्यवाद,

संदीप कुमार महतो

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार