कॉरपोरेट भी नहीं खुश सेवा कर से

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Image caption ऐसोचैम ने कहा है कि बजट से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी

कॉरपोरेट सेक्टर से बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली है. अधिकतर लोगों का मानना है कि इस बजट के बाद महंगाई बढेगी. उनका कहना है कि सर्विस टैक्स यानी सेवा कर का बढ़ाना काफी कड़ा कदम है.

हीरो साइकिल के ओपी मुंजाल का कहना है कि बजट के बाद साइकिल के दामों में 40 से 50 रुपए की बढ़ोतरी होगी. हालांकि उनका कहना है कि कुल मिला कर बजट ठीक है क्योंकि सरकार पर भी दबाव होता है.

उन्होंने कहा, ''सरकार की योजनाएं बहुत बढ़िया हैं. लेकिन उसके खर्चे बहुत बढ़े हैं. इसलिए वक्त के हिसाब से यह काफी अच्छा बजट है.''

खेती और ट्रैक्टर

बजट में खेती की बात करें तो सोनालिका ट्रैक्टर्स के चेयरमैन आईडी मित्तल का कहना है कि बजट बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह साफ नहीं किया गया है कि कितना भाग फार्म मैकनाइजेशन यानी मशीनों से होने वाली खेती के लिए है.

उन्होंने कहा, ''खेती के ऋण का बजट बढ़ा कर एक लाख करोड़ किया गया है लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इसमें से कितना प्रतिशत मशीनों से होने वाली खेती के लिए होना चाहिए जो बड़ा जरूरी था.''

उनका कहना है कि वैसे तो ट्रैक्टर्स को एक्साइज डयूटी से छोड़ा गया है लेकिन इसका तब तक कोई फायदा नहीं है जब तक इसके पुर्जों को इससे मुक्त नहीं किया जाता.

शिक्षा क्षेत्र

एमबीडी ग्रुप की निदेशक सोनिका मल्होत्रा के अनुसार सर्विस टैक्स को बढ़ाना बजट का नकारात्मक भाग है जबकि उनके क्षेत्र में बजट से कोई राहत की खबर नहीं है.

उनका कहना है कि बजट में अच्छी बात यह है कि इसमें आवास निर्माण के क्षेत्र, खास तौर पर सस्ते घर बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया गया है.

शिक्षा क्षेत्र के लोग भी इस बजट तो कोई ज्यादा अच्छा नहीं मान रहे हैं. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के उप कुलाधिपति अशोक मित्तल के अनुसार, ''इससे शिक्षा क्षेत्र में निवेश में कमी आएगी.'' खास तौर पर वे शिक्षा क्षेत्र में सेवा कर लगाए जाने से परेशान है.

उधर ऐसोचैम ने बजट को संतुलित कहा है और यह भी कहा है कि इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी.

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