'बेहोश सरकार का सदमे वाला बजट'

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Image caption इस बजट से उद्योग जगत भी खुश नहीं दिख रहा है विपक्ष ने तो सरकार को आड़े हाथों लिया ही है.

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता अनंत कुमार ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की ओर से पेश किए गए इस साल के बजट को 'बेहोशी में पड़ी हुई सरकार का सदमे वाला बजट' करार दिया है.

सेवा और उत्पाद कर में बढ़ोतरी कर वित्त मंत्री ने एक झटके में ही आम आदमी पर 40,000 करोड़ रूपए का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है.

मनमोहन सरकार ने रेल बजट में पहले ही यात्री टिकट और माल भाड़ा बढ़ाकर आम आदमी पर अतिरिक्त भार डाल दिया था.

वित्त मंत्री के संसद में बजट पेश करने के बाद सदन से बाहर आए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सासंद गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि प्रणव मुखर्जी ने जिस तरह का बजट पेश किया है वो उनके विभाग का एक कलर्क भी कर सकता था.

गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि बजट में रोजगार को लेकर किसी तरह की कोई ठोस योजना नहीं है, न ही इसमें आर्थिक मंदी को लेकर कुछ किया गया है.

भविष्य निधि

बजट को 'प्रभावहीन' बताते हुए भाकपा नेता ने कहा कि बजट से ठीक पहले सरकार ने भविष्य निधि पर मिलने वाले ब्याज दर को साढ़े नौ प्रतिशत से कम करके 8.25 कर दिया है.

बजट में खुदरा व्यापार को मल्टी ब्रांड के लिए खोलने की बात कही गई है जो आम लोगों के हितों के खिलाफ है.

पर्व वित्त मंत्री और सरकार में गृह मंत्री पी चिदंबरम का कहना था कि प्रणव मुखर्जी ने जो बजट पेश किया है, उससे आर्थिक विकास तेज होगा और इसके लिए हमे उनकी सराहना करनी चाहिए.

संसद सत्र के शुरू में दिए गए राष्ट्रपति के भाषण में भी आठ से नौ प्रतिशत आर्थिक विकास की बात कही गई है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि ये शायद संभव न हो सके.

वहीं सरकार में सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि ये बजट 'काबिले बर्दाश्त' है. बीजू जनता दल सांसद जय पांडा ने इसे फीका बताया.

वहीं मार्कस्वादी कम्युनिस्ट पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा है कि ये आम आदमी को और अधिक वित्तीय दबाव में डालेगा.

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