बजट में राजनीतिक बाध्यताओं का ध्यान रखना पड़ा: प्रणव

प्रणव मुखर्जी इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption विपक्ष ने इसे बेहोश सरकार का सदमे वाला बजट करार दिया है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि वर्ष 2012-13 का वित्तीय बजट तैयार करते समय उन्हें राजनीतिक बाध्यताओं को ध्यान में रखना पड़ा.

बीबीसी से एक खास बातचीत में वित्त मंत्री ने हालांकि इस बात से इंकार किया कि शुक्रवार को संसद में पेश किए गए बजट में अर्थनीति पर राजनीति हावी है.

मगर उन्होंने कहा, "लेकिन आपको ये बात ध्यान में रखनी होगी कि अगर आप कोई ऐसा आर्थिक निर्णय लेते हैं जिसे संसद की स्वीकृति नहीं मिल सकती है तो उसका कोई अर्थ नहीं होगा. राजनीति की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखना जरूरी है क्योंकि हमें संसद में पुर्ण बहुमत हासिल नहीं."

खुदरा व्यापार में मल्टी ब्रांड और विमानन क्षेत्र को सीधे विदेशी निवेश के लिए नहीं खोलने पर उद्योग जगत को जो निराशा हुई है उसे लेकर प्रणब मुखर्जी का कहना था ये फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया जाएगा और इसके लिए संसद की हामी जरूरी नहीं है, "लेकिन जब सभी बड़े राजनीतिक दल - जिसमें सभी विरोधी राजनीतिक पार्टियां और कुछ वो दल भी शामिल हैं जो इस साझा सरकार का हिस्सा हैं; तो हम उसकी अनदेखी नहीं कर सकते."

सहमति

"हम इस मामले पर सभी दलों से बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जबतक वो तैयार नहीं हो जाता तबतक हमें इंतजार करना होगा. इस मामले में कोई शार्टकट नहीं लिया जा सकता है."

इस सवाल पर कि क्या वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सब्सिडी कम करने और कर बढ़ाने के अलावा और कुछ किया जा सकता था, प्रणब मुखर्जी का कहना था कि ऐसा नहीं है क्योंकि अगर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत एक सीमा से अधिक हो जाती है तो सरकार को उसपर कदम उठाने पड़ेगें.

क्योंकि ये एक राष्ट्रीय प्रश्न है और किसी एक दल से ही संबंधित नहीं है इसलिए हमें इसपर सामुहिक रूप से कदम उठाने पड़ेंगे.

लेकिन वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि सब्सिडी के मामले में जो लक्ष्य उन्होंने बजट में तय किया है वो उसका कड़ाई से पालन करेंगे.

दुरूपयोग

उनका कहना था कि सिर्फ सब्सिडी कम करना ही काफी नहीं होगा हमें साथ साथ ही इसके दुरूपयोग पर भी रोक लगानी होगी और ये सुनिश्चित करना होगा कि ये उन लोगों तक पहुंचे जो इसके हकदार हैं.

बजट में इस वित्तीय वर्ष के दौरान सब्सिडी को सकल घरेलू उत्पाद के दो प्रतिशत तक कम करने की घोषणा की गई है. अगले तीन वर्षों के लिए ये लक्ष्य 1.75 फीसद है.

प्रणब मुखर्जी से जब ये पूछा गया कि क्या बजट में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उचित कदम उठाए गए हैं और वो विदेशी निवेशकों को क्या संदेश देना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों जैसे विमानन क्षेत्र में विदेशी बाजार से कर्ज उठाने की इजाजत दे दी गई है जो पहले मौजूद नहीं थी.

"मगर हमने ऐसे कर्जों पर एक अरब डॉलर की सीमा लगाई है."

हालांकि उन्होंने साफ किया कि भारत एक कर मुक्त देश नहीं होगा.

संबंधित समाचार