एशियाई कॉरपोरेट घरानों पर कलह का साया

  • 19 मार्च 2012
Image caption एशिया के ज्यादातर कारोबारी दिग्गज अब 80-90 साल के हो रहे हैं. इसलिए नेतृत्व के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज हो या दक्षिण कोरिया की सैमसंग या आईपैड बनाने वाली ताइवान की होन हई कंपनी, एशिया में औद्योगिक घरानों का दबदबा है और पूरी दुनिया के कॉरपोरेट जगत में भी ये चलन बढ़ता जा रहा है.

इनमें से ज्यादातर कारोबारी घरानों की नींव दूसरे विश्व युद्ध के बाद पड़ी थी और उन्हें नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पुरानी पीढ़ी, नई पीढ़ी को कारोबार की कमान सौंप चुकी है या सौंपने की तैयारी में है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर कारोबारी घराने इसमें कामयाब नहीं हुए हैं जिसकी वजह से न केवल अनिश्चतता बढ़ रही है बल्कि उत्तराधिकारियों के बीच कलह, टकराव और दुश्मनी पैदा हो रही है.

कारोबारी कड़वाहट

हांगकांग स्थित आर्थिक मामलों के जानकार प्रोफेसर जोसेफ फेन ने ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर की ऐसी ही कंपनियों का अध्ययन किया है.

वे कहते हैं, ''एशिया के कई उद्यमी बेहद सफल है लेकिन इस आसान सवाल पर विफल हैं.''

शायद यही वजह है कि एशिया के तमाम पत्र-पत्रिकाओं में कारोबार और गॉसिप वाले पन्नों पर कॉरपोरेट परिवारों के भीतर कड़वाहट के किस्से भरे पड़े हैं.

पुरानी बात करें, तो भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी अपने पिता के विशाल रिलायंस साम्राज्य के बंटवारे पर अपने भाई अनिल अंबानी के साथ उलझे रहे.

अर्थव्यवस्था पर असर

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Image caption कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर अम्बानी बंधुओं की तकरार ने भी जमकर सुर्खियां बटोरी थीं.

ताजे मामलों में, पिछले महीने ही सैमसंग के 70 वर्षीय अध्यक्ष ली कुन-ही इसलिए सुर्खियों में रहे क्योंकि कंपनी के शेयरों में साझेदारी को लेकर उनके भाई और बहन ने मुकदमा कर दिया.

इसी तरह, हांगकांग के अरबपति स्टेनली हो के मकाऊ कैसिनो के भविष्य को लेकर बीते साल विवाद खड़ा हो गया था.

गौर करने वाली बात है कि एशिया के ज्यादातर कारोबारी दिग्गज अब 80-90 साल के हो रहे हैं और यही वजह है कि अगले दशक में इनमें नेतृत्व के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

प्रोफेसन फेन कहते हैं, ''ये एक बड़ा खतरा हो सकता है. अर्थव्यवस्था के लिहाज से बात करें तो इन कंपनियों की अहम भूमिका है.''

मसलन, स्टेनली हो के बारे में कहा जाता है कि मकाऊ की अर्थव्यवस्था का 40 फीसदी हिस्सा उनके कब्जे में है.

प्रोफेसन फेन ये भी कहते हैं कि कारोबारी घरानों में अगले उत्तराधिकारी के मुद्दे पर तनातनी का कंपनियों के स्टॉक मार्केट में प्रदर्शन पर भी असर पड़ेगा.

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