वोडाफ़ोन के मामले में सरकार को दूसरा झटका

वोडाफ़ोन इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption वोडाफ़ोन को मिली राहत के बाद कई कंपनियाँ राहत की उम्मीद कर रही हैं

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें वोडाफ़ोन पर लगाए 11 हज़ार करोड़ रुपए के आयकर लगाने के फ़ैसले को ग़लत बताया गया था.

मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया और केएस राधाकृष्णन के एक पीठ ने सरकार की पुनरीक्षण याचिका को ख़ारिज कर दिया.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ही 20 जनवरी को फ़ैसले पर पुनर्विचार की याचिका लगाई थी और कहा था कि इस फ़ैसले में टेलीकॉम कंपनी वोडाफ़ोन को ठीक ढंग से परिभाषित नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफ़ोन के हक़ में फ़ैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें भारत से बाहर हुए इस सौदे में आयकर वसूले जाने को सही ठहराया गया था.

17 फ़रवरी को इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दायर करने के बाद सरकार ने 16 मार्च को पेश किए गए बजट में आयकर क़ानून में परिवर्तन का प्रस्ताव रखा है.

इस परिवर्तन के बाद देश में काम कर रही विदेशी कंपनियों के बीच होने वाले अधिग्रहण या विलय के मामले में सरकार को टैक्स वसूल करने का अधिकार होगा.

मामला

मामला ब्रितानी कंपनी वोडाफ़ोन के वर्ष 2007 में चीन की कंपनी हचिंसन कम्युनिकेशन की भारतीय संपत्तियों को 11 अरब डॉलर में ख़रीदने का है.

बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले में वोडाफ़ोन को 11000 करोड़ की राशि भरने को कहा गया था.

वोडाफ़ोन का कहना था कि इस समझौते के तहत उस पर कोई कर नहीं लगता.

वोडाफ़ोन का तर्क था कि उसने हचिंसन के जिस विभाग का सौदा किया है उसमें वोडाफ़ोन की नीदरलैंड्स स्थित कंपनी सीजीपी इन्वेस्टमेंट्स का 67 प्रतिशत हिस्सा है और वह केयमैन आयलैंड्स में (यानी भारत के बाहर) पंजीकृत है.

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को अपने आदेश में कहा था कि आयकर विभाग वो 2500 करोड़ वोडाफ़ोन को दो महीने के भीतर, चार प्रतिशत के ब्याज के साथ लौटाए. न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से चार हफ़्ते के भीतर 8500 करोड़ की बैंक गारंटी भी लौटाने का आदेश दिया था.

लेकिन इसके बाद सरकार की ओर से याचिका दायर कर दी गई थी.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि आठ अन्य विदेशी कंपनियाँ भारत में इसी तरह के मामलों का सामना कर रही हैं और उन्हें भी राहत मिल सकती है.

संबंधित समाचार