व्यापार संगठनों की मनमोहन को चेतावनी

  • 2 अप्रैल 2012
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Image caption सरकार का कुछ समय से वोडाफोन के साथ कर को लेकर विवाद चल रहा है.

सात अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठनों ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में नए टैक्स प्रस्ताव की आलोचना की है जिसके तहत 50 साल तक के कॉरपोरेट समझौतों की जांच की जा सकती है.

यह प्रस्ताव पिछले महीने पेश किए गए आम बजट का हिस्सा था.

इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि उनके साथ जुड़ी कंपनियां भारत में अपने उद्यमों पर पुनर्विचार कर सकती हैं.

सरकार का पिछले कई सालों से वोडाफोन के साथ टैक्स को लेकर विवाद चल रहा है.

आदेश

जनवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि वोडाफोन 4.4 अरब डॉलर के करों और जुर्मानों का देनदार नहीं है.

यह मामला वोडाफोन की चीनी कंपनी हचिसन टेल्कॉम के साल 2007 में की गई उसकी भारत की संपत्ति की खरीद को लेकर था.

कंपनी से 112 अरब रुपए की कर की मांग की गई थी. बाद में भारत सरकार ने इसका 100 प्रतिशत जुर्माने के रुप में भी मांगा था.

लेकिन वोडाफोन का कहना था कि वो इस कर का देनदार नहीं है क्योंकि यह संपत्ति जिस कंपनी के पास है वह केमैन द्वीप में स्थित है.

प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी पर अमरीका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा और हांगकांग के बड़े संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं.

'अभूतपूर्व कदम'

इन संगठनों में कनैडियन मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्ट्स, द कैपिटल मार्केट्स टैक्स कमेटी ऑफ एशिया, द कन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री, द जापान फॉरेन ट्रेड काउंसिल और द यूनाइटेड स्टेट्स काउंसिल फॉर इंटरनेश्नल बिजनेस शामिल हैं.

पत्र मे कहा गया है, ''विधेयक में इस अचानक और अभूतपूर्व कदम से भारत सरकार की विदेशी निवेश और कर के प्रति नीतियों पर भरोसा कम हुआ है और यह भारत में बराबरी के कानून और उचित बर्ताव पर सवाल खड़े करता है.''

यह भी कहा गया है, ''इससे व्यापक तौर पर भारत में निवेश करने की कीमत और फायदों पर दोबारा से गौर किया जा रहा है.''

यह सब मिल कर कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं सहित 2,50,000 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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