टीसीएस पर अमरीका में मुकदमा

  • 3 अप्रैल 2012

भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कन्सलटेंसी सर्विसिस को अमरीका में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी.

अमरीका की एक अदालत ने कर और वेतन से जुड़े विवाद को लेकर कंपनी के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की अनुमति दे दी है.

टाटा कन्सलटेंसी सर्विसिस (टीसीएस) पर आरोप है कि उसने अपने गैर अमरीकी कर्मचारियों से कहा कि वो कंपनी को टैक्स रिफंड देने पर सहमत हो और हस्ताक्षर करें.

ये भी आरोप है कि कंपनी ने लोगों के वेतन से गैर अधिकृत कटौती की. टीसीएस के अमरीका में हजारों कर्मचारी हैं.

कंपनी के खिलाफ क्लास एक्शन की मंजूरी दी गई है. इस मुकदमे के तहत एक या ज्यादा व्यक्ति कई व्यक्तियों के उपलक्ष में केस कर सकता है.

कर्मचारियों ने टीसीएस के खिलाफ फरवरी 2006 में मुकदमा दायर किया था. आरोप था कि कंपनी ने कर्मचारियों को उतना वेतन नहीं दिया जितना कि अमरीका में काम करने के लिए उनसे वादा किया गया था.

कर्मचारियों के मुताबिक उनसे कहा गया था कि उन्हें कुल अमरीकी वेतन ( ग्रॉस सैलरी) मिलेगा और अमरीका में रहते हुए अलग से भारतीय तनख्वाह.

लेकिन वकीलों का दावा है कि कर्मचारियों के वेतन से पैसे काटे गए जिस कारण टाटा कर्मचारियों को वादे के अनुसार अमरीकी और भारतीय वेतन नहीं मिला.

कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली लॉ फ़र्म की वकील केली डरमोडी ने कहा है कि ये साबित करने की कोशिश की जाएगी कि टाटा ने लेबर लॉ तोड़ा है.

लॉ फ़र्म का कहना है कि इस मुकदमे का असर उन गैर अमरीकी लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने टीसीएस के लिए 14 फरवरी 2002 और 30 जून 2005 के बीच काम किया है और जिन्हें एक जनवरी 2002 के बाद अमरीका भेजा गया है.

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