तेल और गैस के लिए भारत-क़तर में समझौता

  • 10 अप्रैल 2012
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Image caption भारत अपनी ज़रुरतों का 12 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयात करता है

तेल और गैस भंडारों का पता लगाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और कतर ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत की ईंधन की ज़रुरतें बढ़ रही हैं और वह तेल और गैस के नए स्रोतों की तलाश कर रहा है.

भारत पर इस बात का भी दबाव है कि परमाणु कार्यक्रम की वजह से ईरान पर लगे प्रतिबंध के बाद वह ईरान से तेल के आयात में कटौती करे.

भारत अपनी तेल की ज़रुरतों के लिए ईरान पर निर्भर करता है. लेकिन अमरीका और पश्चिमी देश चाहते हैं कि ईरान से तेल के आयात को कम किया जाए जिससे कि ईरान पर परमाणु कार्यक्रम बंद करने के लिए दबाव बढ़ाया जा सके.

अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ 28 जून से नए प्रतिबंध लागू करने जा रहा है. इसके तहत उन देशों के बैंकों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने जा रहा है जो ईरान से तेल का आयात करते हैं.

क़तर के पास मध्यपूर्व का छठवाँ सबसे बड़ा तेल भंडार है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा गैस भंडार है. गैस भंडार के मामले में पहला नंबर रूस का और उसके बाद ईरान का है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क़तर के साथ तेल और गैस के क्षेत्र में समझौते के अलावा क़तर के अमीर शेख हमद बिन ख़लीफ़ा अल-थानी के साथ पाँच और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

इनमें व्यापार और निवेश बढ़ाने के समझौते शामिल हैं.

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