ई-बुक की क़ीमतों पर ऐपल और अमरीका में ठनी

  • 12 अप्रैल 2012
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Image caption अमरीका ने एप्पल कंपनी पर मुकदमा किया है

किताबों के ऑनलाइन संस्करण अर्थात् ई-बुक्स की कीमतों को लेकर अमरीका ने तकनीकी क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी ऐपल और कुछ प्रमुख प्रकाशकों पर मुकदमा दर्ज किया है.

अमरीका ने ऐपल कंपनी के साथ- साथ हाशेट, हार्पर कॉलिन्स, मैकमिलन, साइमन एंड शूस्टर और पेंगुइन जैसे प्रकाशकों पर आरोप लगाया है कि इन लोगों ने ई-बुक्स की कीमतों पर सांठ-गांठ की है.

इस मुकदमे के एक दिन पहले ही ऐपल कंपनी के व्यवसाय ने छह सौ अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था.

न्यूयॉर्क की एक अदालत में बुधवार को दाखिल किए गए इस मुकदमे में कहा गया है, “इन प्रकाशकों ने ऐपल कंपनी के साथ मिलकर मिलकर षड्यंत्र किया और ऐपल ने ई-पुस्तकों की कीमतों को कम करने में इनका साथ दिया.”

वैसे अपुष्ट खबरों के मुताबिक हाशेट, हार्पर कॉलिन्स और साइमन एंड शूस्टर पहले ही इस मामले को रफा-दफा कर चुके हैं.

अमरीकी न्याय मंत्रालय जल्द ही इस बारे में एक संवाददाता सम्मेलन करने जा रहा है.

ऐपल कंपनी किताबों को अपने आई पैड और आई फोन के माध्यम से लोगों को बेचती है.

इस मामले में ऐपल कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

एजेंसी बनाम थोक बिक्री

दरअसल इलेक्ट्रॉनिक किताबों की बिक्री सामान्य किताबों से अलग तरीके से होती है.

ज्यादातर प्रकाशक किताबों का एक थोक दाम रखते हैं, जो कि कवर पेज पर प्रकाशित मूल्य का करीब आधा होता है. उसके बाद खुदरा मूल्य विक्रेता दाम तय करते हैं.

शुरू में यही तरीका ई-पुस्तकों के लिए भी अपनाया गया लेकिन अब यह एजेंसी मॉडल के अनुसार बदल रहा है.

इसके अनुसार प्रकाशक किताब का दाम निर्धारित कर देते हैं और उन्हें बेचने वाले एजेंट इसमें तीस प्रतिशत कमीशन पाते हैं. स्टीव जॉब्स के प्रोत्साहन पर प्रकाशकों ने इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाया.

इस मॉडल से ई-पुस्तकों के बाजार को अमेजन के एकाधिकार से बचाने में भी काफी मदद मिली. क्योंकि अमेजन ने ई-पुस्तकों को बेचने के लिए कीमतों में जबर्दस्त कमी कर दी थी.

अमेजन ने एक बार प्रकाशकों से थोक मॉडल अपनाने के लिए भी कोशिश की थी, लेकिन प्रकाशकों ने मना कर दिया था.

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