भारतीय बाजारों पर पाकिस्तान की नजर

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Image caption स्थानीय टैक्सटाइल उद्योग के दबाव की वजह से इस मांग को लेकर भारत की कुछ आशंकाएं हैं.

पाकिस्तान के भारतीय बाजार में बिना डयूटी के प्रवेश पाने की मांग के चलते दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने के प्रयासों में पहला रोड़ा आ सकता है.

शुक्रवार को दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों की नई दिल्ली में होने वाली बैठक में पाकिस्तान यह मांग दोहराएगा कि कपड़ों के सामान के लिए उसे डयूटी के बिना प्रवेश दिया जाए.

पाकिस्तान के वाणिज्य सचिव जफर महमूद ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा, ''हम खास तौर पर टैक्सटाइल की चीजों के प्रवेश के बारे में देख रहे हैं लेकिन इसके अलावा कई और मुद्दे भी हैं.''

स्थानीय टैक्सटाइल उद्योग के दबाव की वजह से इस मांग को लेकर भारत की कुछ आशंकाएं हैं.

भारतीय टैक्सटाइल उद्योग के महासचिव डीके नायर ने कहा कि उन्होंने सरकार को पाकिस्तान की इस मांग के खिलाफ प्रस्तुति दी है.

विश्लेषकों के अनुसार भारत और पाकिस्तान में हर साल 2.7 अरब डॉलर का औपचारिक व्यापार होता है जबकि तस्करी के माध्यम से होने वाला अनौपचारिक व्यापार इसके तीन गुणा होता है.

मांग

पाकिस्तान कपड़े पर आधारित 288 चीजों की भारत में प्रवेश की मांग कर रहा है. लेकिन जफर महमूद का मानना है कि भारतीय आयात नियंत्रक अधिकारी ने कई बाधाएं लगा रखी हैं जिससे पाकिस्तान के कपड़ों का सामान भारत में नहीं आ पा रहा है.

उन्होंने कहा, ''इन्हें हटाना जरूरी है ताकि पाकिस्तान के व्यापारी सुरक्षित महसूस कर सकें.''

लेकिन भारत का टैक्सटाइल उद्योग इसे लेकर चिंतित है. डीके नायर ने कहा कि पिछले साल बांग्लादेश के कपड़ों के सामान को इस तरह की इजाजत दी गई थी जिससे गंभीर समस्याएं पैदा हुई थी.

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