विकास के लिए ब्याज दरों में कटौती संभव

  • 17 अप्रैल 2012
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Image caption रिजर्व बैंक ने पिछले दो वर्षों में दस बार ब्याज़ दरें बढ़ाई हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के उद्देश्य से अपनी वार्षिक ऋण नीति में ब्याज दरों में कटौती करने के संकेत दिए हैं.

मंगलवार को रिजर्व बैंक अपनी वार्षिक ऋण नीतियों की घोषणा करने वाला है.

इससे पहले बैंक ने कहा है कि वो अपना पूरा ध्यान मंहगाई पर नियंत्रण करते हुए विकास की घटती दर को रोकने पर लगा रहा है.

वार्षिक मौद्रिक नीति जारी करने की पूर्व संध्या पर आरबीआई का कहना था, ''2012-13 के चौथी तिमाही में मंहगाई कम होने की उम्मीद लेकिन ऐसा नहीं हुआ. महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए मौद्रिक नीति में एक संतुलन बनाना होगा जिससे विकास की दर भी बहुत न घटे.''

अपनी मैक्रोइकोनोमिक और मौद्रिक विकास रिपोर्ट में बैंक ने चेताया है कि वर्ष 2012-13 में मंहगाई बरकरार रह सकती है.

महंगाई की चिंता

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमत पर कहा कि ये 'चिंताजनक' है.

नए आकड़ों के अनुसार मार्च महीने में मंहगाई की दर 6.89 प्रतिशत थी जबकि विकास दर घटकर तीन साल के न्यूनतम स्तर 6.9 पर आ पहुंची है.

आरबीआई ने कहा है कि मौद्रिक नीति को विकास के लिए काम करना होगा लेकिन मांग बढ़ाकर मंहगाई पर भी खतरा मोल नहीं लिया जा सकता है.

पिछले कुछ समय में आरबीआई ने मंहगाई पर नियंत्रण करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की रणनीति अपना रखी थी जिसके तहत मार्च 2010 से अब तक 13 बार ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं जिसका बुरा प्रभाव औद्योगिक उत्पादन पर हुआ है.

औद्योगिक उत्पादन में पिछले तीन साल में काफी गिरावट दर्ज हुई है. इसलिए माना जा रहा है कि इस बार आरबीआई अपनी वार्षिक नीति में ब्याज दरों को कम करने का निर्णय ले सकता है.

मार्च महीने में अपनी समीक्षा रिपोर्ट में बैंक ने संकेत दिए थे कि विकास और मंहगाई के संतुलन को बनाए रखने के लिए ब्याज दरें अब अपने चरम पर हैं.

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