वोडाफ़ोन ने भारत सरकार को नोटिस भेजा

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Image caption वोडाफ़ोन ने कहा है कि अगर सरकार अधिग्रहण पर टैक्स लगाने के प्रावधान पर अड़ी रही तो वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मुकदमा करेंगे.

भारत में मोबाइल सेवाएं चलाने वाली ब्रितानी टेलीकॉम कंपनी वोडाफ़ोन ने भारत सरकार को विवाद का नोटिस दिया है. कंपनी ने नोटिस इस वर्ष के बजट में अधिग्रहण पर पूर्वप्रभावी यानी बीते हुए समय से टैक्स लगाने के प्रावधान के विरुद्ध दिया है.

साल 2007 में वोडाफोन ने एक चीनी मोबाइल कंपनी हचिसन कम्यूनिकेशन की भारतीय संपत्तियों का अधिग्रहण किया था. उसके बाद भारत सरकार ने वोडाफोन पर इस अधिग्रहण के लिए 11 हज़ार करोड़ रुपए का टैक्स लगाया था.

वोडाफोन इस टैक्स के विरोध में अदालत गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की टैक्स की मांग को इस वर्ष जनवरी में खारिज कर दिया था.

लेकिन इस वर्ष पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री ने अधिग्रहण की स्थिति में टैक्स लगाए जाने को पूर्वप्रभाव से लागू करने का प्रावधान रखा है यानी बीते समय में किए गए अधिग्रहणों पर भी टैक्स लगाए जाने का प्रावधान.

'अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन'

वोडाफोन ने ‘भारतीय वित्त अधिनियम 2012’ के इन्हीं प्रावधानों पर भारत सरकार को नोटिस जारी किया है. कंपनी के अनुसार ये प्रावधान वोडाफोन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रक्षा करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है.

ये नोटिस वोडाफ़ोन की नीदरलैंड्स स्थित सहयोगी कंपनी ‘वोडाफ़ोन इंटरनेशनल होल्डिंग बी वी’ ने दिया है.

ये भारत और नीदरलैंड्स के बीच ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ के तहत अंतरराष्ट्रीय मुकदमा शुरू करने की ओर उठाया गया कदम माना जा रहा है.

'कानूनी लड़ाई'

वोडाफ़ोन कंपनी के अनुसार ये विवाद भारत सरकार के नए टैक्स प्रावधानों की वजह से शुरू हुआ है जिसे अगर कानून बना दिया जाता है तो इसका असर भारत में कई देशी और विदेशी कंपनियों पर पड़ेगा.

वोडाफोन ने एक बयान जारी कर कहा है, “प्रस्तावित कानून से जनवरी 2012 में भारतीय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी रद्द हो जाएगा, जिसमें कहा गया था कि वोडाफोन पर हचिसन इस्सार के अधिग्रहण के बाद टैक्स की कोई देनदारी नहीं बनती.”

नोटिस में भारत सरकार से पूर्वप्रभावी तरीके से टैक्स के प्रावधान को कानून ना बनाने का अनुरोध किया गया है.

कंपनी ने कहा है कि अगर भारत सरकार उनके अनुरोध को नहीं मानती है तो उनके पास द्विपक्षीय संधि के तहत कानूनी कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा.

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