कौशिक बसु: आर्थिक सुधारों पर बयान निजी

  • 20 अप्रैल 2012
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Image caption कौशिक बासु ने अपने बयान में कहा कि उनका इशारा 2014 में संभावित यूरोपीय आर्थिक संकट की ओर था.

वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार और विख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने सफ़ाई दी है कि आने वाले सालों में आर्थिक सुधारों के धीमे रहने वाला उनका बयान निजी है और ये वित्त मंत्रालय या भारत सरकार की राय नहीं है.

कौशिक बसु ने बुधवार को अमरीका में एक बैठक में कहा था कि भारत में आर्थिक सुधार साल 2014 तक अटकते रहेंगे और कम अहमियत के विधेयक ही संसद में पारित होंगे.

उनके इस बयान को योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने असहमति जताते हुए कहा था कि सारी दुनिया में विकास दर धीमी है.

भारत के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के दो अहम अधिकारियों के बीच अर्थव्यवस्या की दिशा के बारे में मतांतर को सरकार के भीतर विरोधाभास का उदाहरण बताया है.

लेकिन अब कौशिक बासु ने अपनी सफाई में एक बयान जारी कर कहा है, "मेरे कहने का मतलब था कि साल 2014 काफ़ी अहम है क्योंकि इस वर्ष कई यूरोपीय बैंक करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज़ा बांटना शुरू कर देंगे जो उन्हें यूरोपियन सैंट्रल बैंक से मिला है. इससे वैश्विक आर्थिक संकट का एक और दौर शुरू हो जाएगा. लेकिन इस संकट के बाद भारत की रफ़्तार चीन से भी तेज़ हो जाएगी."

कौशिक बासु ने कहा कि साल 2014 में संभावित यूरोपीय आर्थिक संकट को मीडिया ने भारत में 2014 के चुनावों से जोड़ दिया और ये दुर्भाग्यपूर्ण है.

'सारी दुनिया में रफ़्तार धीमी'

इससे पहले मोंटेक सिंह अहलूवालिया कौशिक बसु के बयान से असहमति जताई थी.

मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, "ये सही है कि अर्थव्यस्था की रफ़्तार धीमी हुई है लेकिन ये सारी दुनिया में हुआ है. हमें इसमें सुधार करने के लिए हर संभव काम करना चाहिए. मेरे विचार ये हर आर्थिक सुधार को किए बिना भी संभव है. याद रखें कि हम पांच साल तक नौ प्रतिशत की विकास दर से बढ़े हैं और तब ये सारे आर्थिक सुधार नहीं हुए थे. "

प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री नारायणसामी ने भी बसु से असहमति जताते हुए कहा कि दुनिया भर में चल रही मंदी के बावजूद भारत सात प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है.

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Image caption मोंटेक सिंह अहलुवालिया का कहना है कि पांच साल तक नौ प्रतिशत की दर से बढ़ने के समय भी तो ये आर्थिक सुधार नहीं हुए थे.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी अब सरकार से देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर जवाब मांग रही है.

शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी के प्रवक्ता राजीव प्रताव रूड़ी ने पत्रकारों को बताया, "मोंटेक सिंह ने कहा है कि आर्थिक सलाहकार (कौशिक बसु) सही नहीं बोल रहे. हमें इस पर अधिक बोलने की ज़रूरत नहीं है. सरकार का एक आदमी कुछ बोलता है और दूसरा उससे मतभेद व्यक्त करता. ये है देश की अर्थव्यवस्था का हाल."

कौशिक बसु भारत के वरिष्ठ अर्थशास्त्री हैं और इस समय वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर हैं. वे अमरीका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक हैं और इस समय भारत सरकार के साथ काम करने की वजह से छुट्टी पर चल रहे हैं.

उन्होंने अपना ये ताज़ा बयान विख्यात अमरीकी थिंक टैंक कारनेगी इंडॉउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में हुई एक बैठक में दिया है.

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