'भारत में नेतृत्व का सूनापन नही': प्रणब

Image caption प्रणब मुखर्जी अमरीका में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की बैठक में हिस्सा लेने गए हैं.

अमरीका के दौरे पर गए भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमरीकी उद्योग जगत की भारतीय नेतृत्व में खालीपन की आशंकाओं को खारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा कि भारत में एक सशक्त और स्वीकार्य प्रधानमंत्री हैं.

अमरीका भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी)के एक कथित पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि वो किसी संगठन या संस्था की सोच पर कैसे टिप्पणी कैसे कर सकते हैं. वो केवल सच्चाई पर जोर दे सकते हैं कि केंद्र सरकार में नेतृत्व सम्बंधी खालीपन नहीं है.

प्रणब मुखर्जी अमरीका में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की बैठक में हिस्सा लेने गए हैं.

कहा जा रहा है कि अमरीका-भारत व्यापार परिषद के अध्यक्ष और मैग्रा हिल कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैरोल्ड टेरी मैग्रा-3 ने हाल ही में राष्ट्रपति बराक ओबामा के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्रोमैन को लिखे पत्र में कहा था कि भारत सरकार के मंत्री राजनीतिक उलझनों को ही सुलझाने में व्यस्त रहते हैं और प्रभावशाली नौकरशाह ही दिल्ली को चला रहे हैं.

मैग्रा ने अपने पत्र में कहा था कि राज्य स्तर के नेता काफी प्रभावशाली होते जा रहे हैं, साथ ही केंद्र स्तर पर उपजे खालीपन से सरकार ऐसे फैसले ले रही है जो भारत के निवेश को प्रभावित कर रहे हैं.

मैग्रा ने पत्र में कहा, ''ऐसा लग रहा है कि राजनीतिक ताकत प्रांतों के नेताओं में विकसित हो रही है और केंद्र में एक खालीपन के कारण सरकार के भीतर के ताकतों को भारत में निवेश के वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है.''

भारत के कर नियमों में कुछ बदलावों के बारे में अमरीकी वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा, ''हमने उन्हे बताया है कि कर नियमों में प्रस्तावित बदलाव विशेष नहीं है बल्कि इसकी प्रकृति एक तरह से स्पष्टीकरण जैसी है.''

सरकार अपंग नहीं

नीतिगत सुधारों में अपंगता की छवि को खारिज करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन अर्थव्यवस्था में ऊंची आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है और इसे रोका नही जा सकता है.

निर्णयों की कमी के बारे में आलोचनाओं का जवाब देते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने हाल के महीनों में कई नीतिगत निर्णय किए हैं.

उन्होंने कहा " हमने एक नयी विनिर्माण नीति बनाई है. इससे पहले हमने घोषणा की थी कि हम ढांचागत ऋण कोष का गठन करेंगे. हमने ढांचागत ऋण कोष का गठन किया."

मुखर्जी ने कहा कि वाणिज्यिक ऋण तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं.

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